यूपी के गोरखपुर में सिंचाई विभाग के कार्यालय में गुरुवार की दोपहर में निलंबित लिपिक दीपक पांडेय ने अपने साथियों के साथ आकर मारपीट की। आरोप है कि अधिशासी अभियंता को उसने कई थप्पड़ मारे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि, हिन्दुस्तान वायरल वीडियो के सत्याता की पुष्टि नहीं करता। पुलिस ने अधिशासी अभियंता विपिन विहारी की तहरीर पर निलंबित सहायक अभियंता ध्रुवजी सुमन, लिपिक दीपक पांडेय व चार अज्ञात पर केस दर्ज कर लिया है।
अधिशासी अभियंता विपिन बिहारी सिंह के मुताबिक, गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे मुख्य अभियंता गंडक संगठन विकास कुमार सिंह सिंचाई खंड, गोरखपुर कार्यालय का निरीक्षण कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। आरोप है कि निरीक्षण समाप्त होने के बाद जब मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारी कार्यालय के पीछे स्थित गैलरी से बाहर निकल रहे थे, तभी निलंबित वरिष्ठ सहायक दीपक पांडेय, संबद्ध सहायक अभियंता ध्रुवजी सुमन और उनके साथ आए चार लोगों ने उन पर हमला कर दिया।
आरोप है कि तीन हमलावर हेलमेट पहने हुए थे और पूरी घटना कार्यालय के सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई है। अधिशासी अभियंता का आरोप है कि चालक रामभजन यादव और अन्य कर्मचारियों के हस्तक्षेप से जान बची। सीओ कैंट, आभा सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पुलिस ने तहरीर के आधार पर कैंट थ थाने में केस दर्ज कर लिया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है, जल्द ही उनकी गिरफ्तारी कर ली जाएगी।
एससीएसटी आयोग, सीएम पोर्टल पर भी हैं शिकायतें
प्रकरण में आरोपी बनाए गए दीपक पांडेय व सहायक अभियंता ध्रुव ने पहले प्रार्थना पत्र दिया था। दीपक की पत्नी पूजा पांडेय ने सीएम पोर्टल पर चार प्रार्थना पत्र पूर्व में दिया है, उनका आरोप है कि गलत काम नहीं करने पर साजिशन उनके पति को निलंबित किया गया और वाला गुजारा भत्ता भी नहीं दिया जा रहा था। उनका कहना है कि पति इसी सिलसिले में बातचीत करने के लिए गए थे और गाली देने पर विवाद हो गया। सहायक अभियंता ने एससीएसटी आयोग में प्रार्थना पत्र दिया है।
निलंबित होने पर दी थी धमकी
अधिशासी अभियंता विपिन बिहारी का कहना है कि निलंबित होने के बाद से ही लिपिक धमकी दे रहा था। आरोपी दीपक पांडेय पहले भी 22 जनवरी और 2 अप्रैल को उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और गुंडों से उठवा लेने की धमकी दे चुका है। इसकी लिखित शिकायत 15 अप्रैल को विभागीय अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि उसी का परिणाम यह जानलेवा हमला है।
