शिमला। हिमाचल प्रदेश में ईंधन की खपत घटाने और फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अपने काफिले में कटौती का बड़ा निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इससे पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और जनता को भी संदेश जाएगा कि बचत की शुरुआत ऊपर से हो रही है।
इस मुहिम की शुरुआत राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने की थी। उन्होंने लोक भवन से वाहनों की संख्या घटाई और राज्य सरकार को भी पत्र लिखकर काफिलों में कटौती का सुझाव दिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘ऊर्जा संरक्षण’ आह्वान के बाद राजभवन से शुरू हुई यह पहल अब राज्य सचिवालय तक पहुंच गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उद्देश्य सिर्फ तेल बचाना नहीं है, बल्कि सरकारी तंत्र में सादगी का संदेश देना भी है।
एक गाड़ी में बैठेंगे ज्यादा अधिकारी
मुख्यमंत्री सुक्खू मौजूदा समय में आधिकारिक दौरों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल करते हैं। अधिकारियों के अनुसार, गैर-जरूरी गाड़ियों को हटाया जाएगा और एक ही वाहन में ज्यादा अधिकारियों को बैठने की व्यवस्था की जाएगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
सरकार 2023 में ही सभी विभागों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के निर्देश दे चुकी है। एचआरटीसी की 1500 डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से ई-बसों से बदलने की योजना भी चल रही है।
मंत्रियों व अधिकारियों को भी निर्देश
सरकार ने सभी मंत्रियों, सीपीएस और वरिष्ठ अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे कम से कम वाहनों का उपयोग करें। बैठकों और फील्ड विजिट के लिए कार पूलिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। जिला स्तर पर भी डीसी और एसपी को अपने काफिले की समीक्षा करने को कहा गया है।
