चंडीगढ़: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज एक बार फिर अपने ही विभाग की कार्यप्रणाली को परखने के लिए अचानक सक्रिय हो गए। अधिकारियों और कर्मचारियों को औचक निरीक्षणों से सतर्क रखने के लिए चर्चित मंत्री विज ने इस बार पंचकूला स्थित 1912 बिजली शिकायत कॉल सेंटर में पहुंचकर स्वयं एक आम उपभोक्ता बनकर शिकायत दर्ज कराई।
कॉल सेंटर में बैठे हुए उन्होंने फोन कर कहा,
“मैं अंबाला से अनिल विज, बिजली उपभोक्ता बोल रहा हूं। मेरे घर की बिजली खराब है।”इस पर कॉल सेंटर कर्मचारी ने उनसे सब डिवीजन की जानकारी मांगी। तभी मंत्री विज ने तुरंत जवाब दिया,
“मैं उपभोक्ता हूं, मेरा पता लिखो। मुझे एसडीओ या सब डिवीजन के बारे में नहीं पता। मेरे घर बिजली नहीं है, इसे ठीक कराओ।”
कुछ ही मिनटों में सक्रिय हुआ पूरा सिस्टम
मंत्री की शिकायत दर्ज होने के थोड़ी देर बाद ही संबंधित जेई, फिर एसडीओ और उसके बाद एक्सईएन के फोन लगातार बजने लगे। देखते ही देखते बिजली विभाग के कर्मचारी मंत्री के आवास पर पहुंच गए।
एक आम उपभोक्ता बनकर की गई इस पूरी कार्रवाई ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों में हलचल पैदा कर दी। अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश गया कि उपभोक्ता शिकायतों के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रोहतक कॉल सेंटर में मिली सबसे अधिक शिकायतें
निरीक्षण के दौरान मंत्री विज ने पाया कि हरियाणा में सबसे अधिक शिकायतें रोहतक कॉल सेंटर क्षेत्र से प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने पंचकूला और रोहतक के अधीक्षण अभियंताओं (SE) से सीधे बातचीत कर गर्मी के मौसम में बिजली संकट से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए युद्ध स्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए।
मोरनी और पिंजौर क्षेत्रों में कई घंटों से बिजली बाधित रहने की शिकायतों की लंबी सूची भी मंत्री ने देखी और अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई करने को कहा।
“काम ठीक से करो, नहीं तो किसी और को लगाऊंगा”
कॉल सेंटर में बैठे-बैठे ही मंत्री विज ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा —“काम को ठीक से करो। अगर कोई दिक्कत है तो बताओ, नहीं तो मैं किसी और को लगा दूंगा।”
शिकायतों का लाइव डैशबोर्ड लगाने के निर्देश
मंत्री विज ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय रहते समाधान हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों का एक लाइव डैशबोर्ड उनके कार्यालय में लगाया जाए, जिससे यह स्पष्ट दिखाई दे सके कि शिकायत कब आई और उसका समाधान कब हुआ। ऊर्जा मंत्री की इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही और उपभोक्ता सेवाओं की निगरानी के बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
