देहरादून। उत्तराखंड में कृषि-औद्यानिकी को रोजगार-स्वरोजगार का आधार बनाने के लिए सरकार नई पहल करने जा रही है। सीएम-समृद्धि (मुख्यमंत्री-विविधीकृत बागवानी एवं एकीकृत कृषि के विकास के लिए आधुनिक नवाचार में कौशल उन्नयन) योजना के जरिए युवाओं, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को कृषि-औद्यानिकी से जोड़कर उद्यमी बनाया जाएगा।
योजना के संचालन को शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। योजना में चालू वित्तीय वर्ष में 19 हजार लोगों को ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण देने की तैयारी है और इन दिनों प्रशिक्षण माड्यूल को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
राज्य की जलवायु और भौगोलिक विविधता फल-सब्जी, मसाले, मिलेट, खाद्यान्न, दलहन-तिलहन, मशरूम, सगंध पादप, जड़ी-बूटी, चाय और शहद उत्पादन के लिए अनुकूल है। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।
इस सबको देखते हुए महिलाओं और पूर्व सैनिकों को कृषि-औद्यानिकी आधारित उद्यमों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी आलोक में एक वर्ष के लिए सीएम समृद्धि योजना लाई गई है।
हर ब्लॉक से 200 प्रतिभागी
सीएम समृद्धि के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेश राम के अनुसार योजना के तहत सभी 95 ब्लॉक में प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक ब्लॉक से 200 युवाओं, महिलाओं और पूर्व सैनिकों का चयन प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा।
आवेदन विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होंगे। इच्छुक अभ्यर्थी अपनी पसंद की फसल या गतिविधि का चयन कर सकेंगे। चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगा और सभी ग्राम पंचायतों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
विशेषज्ञ बताएंगे कमाई का रास्ता
प्रशिक्षण में केवल उत्पादन तक सीमित जानकारी नहीं दी जाएगी। कृषि विशेषज्ञों, कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों और संबंधित विभागों के सहयोग से गठित ब्लाकवार टीमें उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, प्रसंस्करण और मार्केटिंग का प्रशिक्षण देंगी। उद्यम शुरू करने वालों को डीपीआर तैयार करने में उद्यान विभाग, नाबार्ड और बैंकों का सहयोग भी मिलेगा। इससे प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों को अपने उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
