एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने बताया कि पहले श्रद्धालुओं का जत्था 12 अप्रैल को भारत से रवाना होकर 21 अप्रैल को वापस लौटने वाला था। हालांकि प्रशासनिक कारणों और यात्रा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में संशोधन किया गया है। अब श्रद्धालुओं का जत्था 10 अप्रैल को पाकिस्तान के लिए रवाना होगा और 19 अप्रैल को भारत लौटेगा।
उन्होंने बताया कि इस धार्मिक यात्रा के लिए एसजीपीसी की ओर से कुल 1860 पासपोर्ट पाकिस्तान दूतावास को भेजे गए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इनमें से लगभग 1800 श्रद्धालुओं को वीजा जारी किया जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में संगत पाकिस्तान स्थित पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन कर सकेगी।
गौरतलब है कि वर्ष 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद कई ऐतिहासिक और पवित्र सिख धार्मिक स्थल पाकिस्तान में रह गए थे। इनमें गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब, गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब और अन्य महत्वपूर्ण गुरुद्वारे शामिल हैं। इन पवित्र स्थलों के दर्शन को लेकर हर वर्ष संगतों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है और बैसाखी के अवसर पर आयोजित यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। एसजीपीसी ने श्रद्धालुओं से यात्रा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने और निर्धारित समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने की अपील की है।
