शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में गगल एयरपोर्ट भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की आड़ में किए गए भूमि सौदों पर सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सदन में इस संबंध में वक्तव्य देते हुए कहा कि सरकार में न तो किसी गरीब की मजबूरी का सौदा होने दिया जाएगा, न सरकारी मुआवजे की बंदरबांट होगी और न ही किसी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर समझने की छूट मिलेगी।
उन्होंने कहा कि गगल एयरपोर्ट के लिए प्रस्तावित भूमि के आसपास और गगरेट क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा गरीब व साधारण लोगों से औने-पौने दामों पर जमीन खरीदने का मामला सामने आया था। इसके पीछे मुख्य मकसद सरकारी अधिग्रहण के समय मोटा मुआवजा ऐंठना था।
किया था एसआईटी गठन
पिछले सत्र में विधायक राकेश कालिया द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद 17 फरवरी को घोषणा की गई थी और अगले ही दिन 18 फरवरी को पुलिस महानिदेशक ने डीआईजी (धर्मशाला) की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया था।
जांच की प्रमुख उपलब्धियां और कार्रवाई
एसआईटी अब तक जांच से जुड़ी 9 अलग-अलग स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। संदिग्ध बेनामी सौदों और संबंधित बैंक लेन-देन की गहन पड़ताल के बाद राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो में 4 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश काश्तकारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े मामलों को आगामी कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित जिला कलेक्टरों को भेजा गया है।
भाषणों से नहीं, फैसलों से आंकी जाती है नीयत
विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन में कहा गया कि सरकार की नीयत भाषणों से नहीं, बल्कि फैसलों से परखी जाती है। सवाल उठने पर न तो मामले को दबाया गया और न ही फाइल बंद की गई। स्पष्ट किया गया कि आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसकी राजनीतिक पहचान, पद या पहुंच नहीं देखी जाएगी, केवल तथ्य, साक्ष्य और कानून के आधार पर कार्रवाई होगी। सरकार गरीबों की जमीन, सरकारी खजाने और हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
