लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के अलीगंज में बीते सोमवार को आग लगने की घटना को एक बड़ा सबक बताते हुए कहा है कि इस पीड़ा दायक घटना से सीख लेते हुए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए शासन, प्रशासन और आमजन को मिलकर अग्निसुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
मुख्यमंत्री ने अग्निसुरक्षा की जांच को लेकर सभी जिलों में विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन कर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। एसआइटी अस्पतालों, नर्सिंग होमों, मेडिकल कालेजों, कोचिंग संस्थानों, शापिंग माल, सरकारी भवनों तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच कर अग्निसुरक्षा की व्यवस्था को पुख्ता बनाएगी।
मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश भर में अग्निसुरक्षा को लेकर चलाया जाने वाला अभियान पूरी तरह जनहित में संचालित किया जाएगा। पहले जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभियान के नाम पर किसी भी नागरिक का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।
सभी कोचिंग संस्थानों को पंजीकरण कराने के दिए निर्देश
एसआइटी में अग्निशमन विभाग, संबंधित विकास प्राधिकरण, नगर निगम, बिजली, पुलिस व संबंधित जिले के एसडीएम को शामिल किया जाएगा। उन्होंने सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण कराने के भी निर्देश दिए। साथ ही कहा कि व्यावसायिक भवनों में अग्निशमन विभाग से प्राप्त अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भवन परिसर में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भवन अथवा भूमि का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए, जिसके लिए उसे स्वीकृति प्रदान की गई है। आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन नहीं होना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि किसी भी परिस्थिति में बेसमेंट में कोचिंग अथवा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन न होने पाए।
यदि बेसमेंट पार्किंग के लिए स्वीकृत है तो उसका उपयोग केवल पार्किंग के लिए ही किया जाए। मुख्यमंत्री ने व्यावसायिक भवनों के विद्युत भार (लोड) की भी जांच कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां विद्युत भार निर्धारित मानकों के विपरीत पाया जाए अथवा अन्य नियमों का उल्लंघन हो रहा हो, वहां तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने की अग्निकांड की बिंदुवार समीक्षा
मुख्यमंत्री ने लखनऊ में घटित आग लगने की दुर्घटना की बिंदुवार समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकालीन सेवाओं का रिस्पांस टाइम जितना कम होगा, संकट की परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य उतने ही प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकेंगे। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को अपने रिस्पांस टाइम को और कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने तथा उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित घोष ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 14 एम्बुलेंस तत्काल मौके पर भेजी गई थीं। मुख्यमंत्री ने तीन जून को नई दिल्ली के मालवीय नगर में हुई अग्नि दुर्घटना का उल्लेख करते हुए प्रदेश में अग्निसुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि अग्निशमन विभाग को और अधिक सक्षम बनाने के लिए जिन आधुनिक उपकरणों, संसाधनों एवं तकनीकी उपकरणों की खरीद के निर्देश दिए।
महानिदेशक अग्निशमन सेवा सुजीत पांडेय ने बताया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। 26 नए अग्निशमन केंद्र लोकार्पण के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त 47 नए केंद्रों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने शेष तहसीलों में भी अग्निशमन सेवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
