देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले भाजपा ने संगठन के मोर्चे पर नई टीम उतार दी है. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को उत्तराखंड का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है. राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन और लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज को सह प्रभारी बनाया गया है. इसके साथ ही फणींद्रनाथ शर्मा को प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी दी गई है. ऐसे में भाजपा की चुनावी तैयारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई टीम का अनुभव प्रदेश की राजनीति पर कितना असर डालेगा? पुराने चेहरों से यह टीम कितनी अलग साबित होगी?
भजपा ने उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी शुरू कर दी है. नई टीम में एक तरफ राष्ट्रीय राजनीति और चुनावी रणनीति का अनुभव रखने वाले राम माधव हैं तो दूसरी तरफ संगठन के स्तर पर काम करने वाले अरविंद मेनन और फणींद्रनाथ शर्मा हैं. वहीं बांसुरी स्वराज के रूप में पार्टी ने युवा संसदीय चहरे को जिम्मेदारी दी है. यानी नई टीम में रणनीति संगठन और नई पीढ़ी के नेतृत्व का अलग-अलग अनुभव एक साथ दिखाई दे रहा है.
राम माधव के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा क्यों? नई टीम में सबसे ज्यादा चर्चा राम माधव को लेकर है. इसकी वजह उनका लंबा संगठनात्मक अनुभव और अलग अलग राज्यों में पार्टी के लिए काम करने का रिकॉर्ड है. राम माधव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुराने प्रचारक रहे हैं. वर्ष 2014 में भाजपा में आने के बाद राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार: राजनीतिक जानकार सुनील दत्त पांडे कहते हैं वर्ष 2014 से 2020 तक राष्ट्रीय महासचिव रहते हुए उन्होंने पार्टी के विस्तार से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम संभाले. खास तौर पर असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में संगठन खड़ा करने की जिम्मेदारी उनके पास रही. असम के साथ जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर की राजनीति में भी राम माधव की भूमिका चर्चा में रही है. जम्मू-कश्मीर में भाजपा को मजबूत करने और वर्ष 2015 में पीडीपी-भाजपा गठबंधन के गठन में भी उनकी भूमिका बताई जाती है. अलग अलग राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों में संगठन के साथ काम करने का उनका अनुभव ही उत्तराखंड की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी चर्चा की सबसे बड़ी वजह है.
पहाड़ की राजनीति में काम आएगा पुराना अनुभव: सुनील दत्त पांडे कहते हैं उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है जहां पहाड़ और मैदान की राजनीतिक परिस्थितियां एक दूसरे से काफी अलग हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय रखना, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क और क्षेत्रीय मुद्दों को चुनावी रणनीति से जोड़ना बड़ी चुनौती होती है. राम माधव इससे पहले भी अलग-अलग भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों वाले राज्यों में काम कर चुके हैं. ऐसे में उनका अनुभव उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में संगठन को लेकर पार्टी की रणनीति में इस्तेमाल किया जा सकता है.
उन्होंने कहा पार्टी के भीतर राम माधव की पहचान केवल संगठनकर्ता के तौर पर ही नहीं बल्कि वैचारिक मुद्दों पर स्पष्ट बात रखने वाले नेता और रणनीतिकार के तौर पर भी रही है. ऐसे में प्रदेश प्रभारी के रूप में उनकी भूमिका संगठन की चुनावी दिशा तय करने, स्थानीय परिस्थितियों को समझने और राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीति को प्रदेश स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण हो सकती है.
बीजेपी नेता और दर्जाधारी मंत्री ओम प्रकाश जमदग्नि कहते हैं उनका अनुभव हम सभी के काम आएगा. उनके नाम की घोषणा होने के बाद हमारी उनसे मुलाकात हुई है. वे उत्तराखंड को बहुत बारीकी से जानते हैं. उनकी ऊर्जा हमें बातों से ही पता लग रही है. हम आने वाले चुनाव में एक बार फिर से अपनी सरकार बनाएंगे. ऐसा विजन राम माधव का है.
अरविंद मेनन की भूमिका भी होगी महत्वपूर्ण: बीजेपी नेता अभिमन्यु कुमार कहते हैं नई टीम में अरविंद मेनन को सह प्रभारी बनाया गया है. उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत संघ के प्रचारक के तौर पर हुई. बाद में मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाली. वर्ष 2011 से 2016 के बीच मध्य प्रदेश संगठन में काम करने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां मिलीं. पश्चिम बंगाल में भी उन्होंने पार्टी के संगठन विस्तार से जुड़ा काम संभाला. पार्टी संगठन के स्तर पर काम करने का अनुभव है. ऐसे में उत्तराखंड में उनकी जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा कार्यकर्ताओं से संपर्क संगठनात्मक गतिविधियों और बूथ स्तर की तैयारियों से जुड़ा रह रहेगा. चुनावी राजनीति में जब हर बूथ पर संगठन की मौजूदगी महत्वपूर्ण होती है, तब मेनन का संगठनात्मक अनुभव भाजपा के लिए उपयोगी होगा.
बांसुरी स्वराज के जरिए युवा चेहरा: भाजपा की नई टीम में बांसुरी स्वराज सबसे चर्चित युवा चेहरों में शामिल हैं. दिल्ली की नई दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद बांसुरी स्वराज पेशे से अधिवक्ता हैं. सुप्रीम कोर्ट में वकालत का अनुभव रखती हैं. सक्रिय राजनीति में आने से पहले उन्होंने करीब दो दशक तक कानून के क्षेत्र में काम किया. इसके बाद दिल्ली भाजपा के लीगल सेल से जुड़ीं. वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं. बांसुरी स्वराज का उत्तराखंड से पारिवारिक रिश्ता भी रहा है.
वरिष्ट पत्रकार किरण कुमार कहते हैं उनकी मां और भाजपा की वरिष्ठ नेता रहीं सुषमा स्वराज उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं. यही वजह है कि उत्तराखंड में बांसुरी की नियुक्ति को केवल एक संगठनात्मक जिम्मेदारी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. संसद कानून और सार्वजनिक संवाद का उनका अनुभव प्रदेश की राजनीति में पार्टी के लिए अलग तरह की भूमिका तैयार कर सकता है.
संगठन महामत्री फणींद्रनाथ शर्मा की जिम्मेदारी: प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारियों के साथ फणींद्रनाथ शर्मा को प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी दी गई है. यह पद भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण माना जाता है. कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय से लेकर संगठन की गतिविधियों को बूथ और मंडल स्तर तक पहुंचाने में संगठन महामंत्री की भूमिका रहती है. शर्मा इससे पहले अलग-अलग राज्यों में संगठन से जुड़े दायित्व संभाल चुके हैं. ऐसे में चुनाव से पहले प्रदेश प्रभारी सह प्रभारी और संगठन महामंत्री की नई टीम के बीच तालमेल भाजपा की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा.
पुराने चेहरों से कितनी अलग है नई टीम? इस सवाल को लेकर राजनीतिक जानकार सुनील दत्त पांडे कहते हैं भाजपा की नई टीम को देखें तो इसमें एक साथ कई तरह का अनुभव दिखाई देतें हैं. राम माधव के पास राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव और संगठन का अनुभव है. अरविंद मेनन लंबे समय से संगठनात्मक जिम्मेदारियों में रहे हैं. फणींद्रनाथ शर्मा भी संगठन के स्तर पर अलग-अलग राज्यों में काम कर चुके हैं. बांसुरी स्वराज संसद तथा कानून के क्षेत्र से राजनीति में आई हैं. यानी पार्टी ने इस बार ऐसी टीम बनाई है जिसमें राष्ट्रीय रणनीति संगठन की जमीनी पकड़ और युवा संसदीय चेहरा तीनों को जगह मिली है. अब इस अनुभव का इस्तेमाल उत्तराखंड के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और मुद्दों के साथ किस तरह किया जाता है ये देखना होगा. राज्य में सरकार के साथ किस तरह का तालमैल रहता है ये भी बेहद महत्वपूर्ण है.
चुनाव से पहले नई टीम के सामने पहली बड़ी चुनौती: वैसे देखा जाए तो नई टीम के सामने विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को चुनावी मोड में लाने की चुनौती है. इसके साथ ही राज्य में अलग अलग क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और चुनावी तैयारियों को एक साथ आगे बढ़ाना होगा. भाजपा के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रीय स्तर की रणनीति और उत्तराखंड के स्थानीय मुद्दों के बीच तालमेल कैसे बनाया जाए?
अब नजर चुनाव प्रभारी की नियुक्ति पर: प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारियों की नियुक्ति के बाद अब भाजपा के चुनाव प्रभारी के ऐलान का इंतजार है. विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रभारी की भूमिका अलग होती है. पार्टी आमतौर पर चुनाव नजदीक आने पर इस जिम्मेदारी के लिए अलग नेता नियुक्त करती है. ऐसे में आने वाले दिनों में चुनाव प्रभारी की नियुक्ति के बाद भाजपा की पूरी चुनावी टीम की तस्वीर और साफ हो सकती है. फिलहाल उत्तराखंड भाजपा की नई टीम में सबसे बड़ा नाम राम माधव का है, लेकिन चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाने में अरविंद मेनन फणींद्रनाथ शर्मा और बांसुरी स्वराज की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है. अब असली सवाल यही है कि अनुभव से भरी यह नई टीम उत्तराखंड के पहाड़ से लेकर मैदान तक संगठन और चुनावी रणनीति के बीच कितना बेहतर तालमेल बैठा पाती है.
