देहरादून: उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों को तकनीक से जोड़ते हुए ग्रामीणों की सुविधाएं बढ़ाने पर विचार चल रहा है. इस दिशा में ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारी मशीनरी को फोकस करते हुए इन्हें हाईटेक करने की कोशिश हो रही है. शायद यही कारण है कि ग्राम्य विकास विभाग अब अपने अधिकारियों के लिए लैपटॉप योजना तैयार कर रहा है.
उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में ग्राम्य विकास विभाग एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. राज्य सरकार अब ग्राम पंचायत अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी कर रही है. इसके तहत प्रदेश के सभी कार्यरत ग्राम पंचायत अधिकारियों को लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे अपने क्षेत्र में रहते हुए ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का संचालन और निगरानी कर सकें.
गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी: इतना ही नहीं इन लैपटॉप को जीपीएस आधारित सिस्टम से भी जोड़ा जाएगा, जिससे अधिकारियों की उपलब्धता और कार्य गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी. देश-दुनिया में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने आम लोगों के जीवन को काफी आसान बनाया है.
अधिकारियों को तकनीक से जोड़ा जाए: दरअसल, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं में डिजिटल माध्यमों का तेजी से विस्तार हुआ है. हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी तंत्र अभी भी कई मामलों में पारंपरिक व्यवस्था पर निर्भर दिखाई देता है. ऐसे में राज्य सरकार का मानना है कि यदि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को तकनीक से जोड़ा जाए तो इसका सीधा लाभ गांवों में रहने वाले लोगों को मिलेगा. इसी सोच के साथ ग्राम्य विकास विभाग ने ग्राम पंचायत अधिकारियों के लिए लैपटॉप योजना तैयार की है.
ग्राम पंचायत अधिकारियों के करीब 900 पद स्वीकृत: विभाग के अनुसार उत्तराखंड में ग्राम पंचायत अधिकारियों के करीब 900 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में लगभग 700 पदों पर ही अधिकारी कार्यरत हैं. योजना के पहले चरण में इन्हीं सभी कार्यरत अधिकारियों को लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएंगे. साथ ही उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरकारी एप्लीकेशनों का बेहतर तरीके से उपयोग कर सकें.
मोबाइल कार्यालय की अवधारणा: सरकार इस पूरी व्यवस्था को मोबाइल कार्यालय की अवधारणा के रूप में विकसित करना चाहती है. इसका उद्देश्य यह है कि ग्राम पंचायत अधिकारी अपने कार्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकें. लैपटॉप मिलने के बाद अधिकारी फील्ड में रहते हुए ही विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर सकेंगे, लाभार्थियों का डाटा अपडेट कर सकेंगे और जरूरी प्रशासनिक कार्य ऑनलाइन निपटा सकेंगे.
योजना के तहत दिए जाने वाले लैपटॉप में ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं से संबंधित जरूरी सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन पहले से इंस्टॉल किए जाएंगे. इसके माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, स्वच्छता अभियान, स्वरोजगार योजनाओं सहित अन्य विकास कार्यक्रमों की निगरानी और रिपोर्टिंग आसान हो जाएगी.
अधिकारियों को किसी जानकारी के लिए बार-बार कार्यालय लौटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. इस पहल का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीणों और किसानों को मिलने की उम्मीद है. अभी तक ग्रामीणों को कई छोटे-छोटे कार्यों के लिए पंचायत कार्यालय या ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं. कई बार अधिकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकारी गांव में ही लोगों की समस्याएं सुन सकेंगे और ऑनलाइन माध्यम से उनके कार्यों का निस्तारण कर सकेंगे. इससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी.
जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से भी जोड़ने की तैयारी: सरकार की योजना केवल लैपटॉप वितरण तक सीमित नहीं है. विभाग इन उपकरणों को जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से भी जोड़ने की तैयारी कर रहा है. इससे अधिकारियों की लोकेशन और उनकी कार्यगत गतिविधियों का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा.
विभाग का मानना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि अधिकारी वास्तव में अपने निर्धारित क्षेत्रों में जाकर कार्य कर रहे हैं.
आज के दौर में तकनीक विकास का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ना जरूरी है. ग्राम पंचायत अधिकारियों को लैपटॉप उपलब्ध कराने का उद्देश्य केवल प्रशासनिक सुविधा बढ़ाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण जनता तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को और मजबूत बनाना है. सरकार चाहती है कि किसानों और ग्रामीणों को अधिकतर सरकारी सुविधाएं उनके गांव में ही उपलब्ध हो सकें, ताकि उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें.
-भरत चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री-
ग्रामीण विकास मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से योजनाओं की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन में भी सुधार आएगा. इससे योजनाओं की प्रगति की वास्तविक स्थिति समय-समय पर सामने आ सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे. सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि होगी.
उत्तराखंड राज्य स्थापना के करीब 26 वर्ष बाद ग्रामीण प्रशासन को इस स्तर पर तकनीक से जोड़ने की पहल को स्थानीय जनप्रतिनिधि भी सकारात्मक कदम मान रहे हैं. पौड़ी जिले के द्वारीखाल ब्लॉक के जिला पंचायत सदस्य महेंद्र राणा का कहना है कि सरकार का यह प्रयास सराहनीय है. उनका मानना है कि तकनीक के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है और ग्रामीणों को बेहतर सेवाएं मिल सकती हैं.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल उपकरण उपलब्ध करा देना ही पर्याप्त नहीं होगा. अधिकारियों को तकनीक का सही और प्रभावी उपयोग करना भी आना चाहिए. यदि लैपटॉप और डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल पूरी जिम्मेदारी और दक्षता के साथ किया गया तो इसका लाभ सीधे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचेगा और विकास कार्यों में तेजी आएगी.
