लखनऊ। यूपी में टेक्निकल पढ़ाई करने वाले छात्रों बड़ी खबर की है। दरअसल, प्राइवेट इंजीनियरिंग और वोकेशनल कॉलेजों की फीस में बढ़ोतरी नहीं होगी। पिछले शैक्षिक सत्र 2025-26 की फीस ही इस बार भी ली जाएगी । प्राविधिक शिक्षा विभाग ने दुर्गा पूजा के मौके पर छात्रों को बड़ी राहत दे दी है।
निजी क्षेत्र के डिग्री , डिप्लोमा और सहायता प्राप्त डिप्लोमा स्तर के इंजीनियरिंग व्यावसायिक संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों के छात्रों को इसका लाभ मिलेगा । प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रवेश व फीस नियमन समिति की बैठक में छात्रों को हितों को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष 2025-26 की मानक फीस को ही एक साल आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2026-27 में भी लागू करने का फैसला किया है।
शासन ने उन कॉलेजों के लिए भी पुरानी फीस की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, जिनकी फीस मानक दर से अलग तय की गई थी। जिन संस्थानों वर्ष 2917-18 में तीन सत्रों यानी 2919-20 के लिए तय की गई थी, उनके यहां भी इस सत्र में पुरानी फीस ही वसूली जाएगी। इसी तरह वर्ष 2018-19 में जिन संस्थानों की फीस 2018-19 से 2020-21 तक के लिए तय हुई थी, वहां भी पिछले सत्र 2025-26 की तरह ही पुरानी फीस ली जाएगी।
निजी स्कूलों में गरीब बच्चों की मुफ्त पढ़ाई को दिए 698 करोड़
उधर,निजी स्कूलों में गरीब परिवार के बच्चों को मुफ्त शिक्षा में कोई परेशानी न होने पाए लिहाजा यूपी सरकार ने हाल ही में गरीब परिवार के 6.93 लाख बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त पढ़ाई कराने के लिए 698 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। फीस के साथ-साथ स्टेशनरी व किताबें खरीदने के लिए भी धन दिया गया है। पिछले व वर्तमान शैक्षिक सत्र के साथ ही अगले वर्ष के लिए भी बजट दिया गया है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में गरीब परिवार के बच्चों का मुफ्त दाखिला कराया जा रहा है। शैक्षिक सत्र 2025-26 तक के 5.36 लाख बच्चे और वर्तमान शैक्षिक सत्र 2026-27 में नए प्रवेश लेने वाले 1.57 लाख बच्चों की शुल्क प्रतिपूर्ति व वित्तीय मदद दी गई है। जिसके लिए 698 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। जिलों में निजी स्कूलों को प्रति छात्र प्रति महीना करीब 450 रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति के दिए जा रहे हैं। वहीं पांच हजार रुपये वित्तीय सहायता भी पढ़ाई के लिए दी जा रही है। जिससे बच्चों के लिए किताबें व स्टेशनरी इत्यादि खरीदी जा सके। पांच हजार रुपये वित्तीय सहायता एकमुश्त अभिभावकों के आधार लिंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही है। वहीं शुल्क प्रतिपूर्ति निजी स्कूलों को की जा रही है।
