शिमला। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के समयबद्ध वितरण नियमों में संशोधन किया गया है। प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के तहत अब हर तिमाही में अंतिम माह के पहले सप्ताह में पात्र लाभार्थियों को पेंशन मिलेगी। प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 99,799 नए मामलों को स्वीकृति प्रदान की है, जिससे राज्य में कुल लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 8,41,917 हो गई है।
किस योजना में कितने लाभार्थी
इन लाभार्थियों में वरिष्ठ नागरिक, विधवाएं, एकल महिलाएं और दिव्यांगजन विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत शामिल हैं। कुल लाभार्थियों में से 1,04,740 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, 5,04,253 को राज्य वृद्धावस्था पेंशन, 25,414 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन, 1,26,808 को विधवा, निराश्रित और एकल महिला पेंशन, 1,340 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन तथा 78,291 को विकलांगता राहत भत्ता प्रदान किया जा रहा है।
पेंशन के समय पर वितरण के लिए संशोधन : सीएम
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 41,799 नए मामले स्वीकृत किए गए हैं। 2024-25 में 41,012 और 2025-26 में 16,988 नए मामले स्वीकृत हुए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हाल ही में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है, ताकि पेंशन का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण के प्रति सरकार ने प्रतिबद्धता से कार्य करते हुए 69 वर्ष तक की 2,67,040 महिलाओं को योजना के तहत प्रतिमाह 1,500 रुपये की पेंशन दी जा रही है। राज्य में वर्तमान में 5,04,253 वृद्धावस्था पेंशनधारक, 1,26,808 विधवा, निराश्रित और एकल महिला लाभार्थी, 78,291 विकलांगता राहत भत्ता प्राप्तकर्ता, 1,021 कुष्ठ रोग पुनर्वास भत्ता पाने वाले तथा 50 ट्रांसजेंडर पेंशनधारक हैं।
7000 दिव्यांग लोगों को 3000 रुपये पेंशन
सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1,700 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है, जिससे लगभग 7,000 लोग लाभान्वित होंगे।
सीएम ने कहा कि विधवा, परित्यक्ता और एकल महिलाओं के साथ-साथ 40 से 69 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने के लिए आय सीमा और ग्राम सभा की स्वीकृति की अनिवार्यता को समाप्त करना सरकार द्वारा किए गए सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में एक हैं।
