मंडी। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद कंगना रनौत की ओर से खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) के प्रति अपनाई गई भाषा-शैली पर हिमाचल प्रदेश खंड विकास अधिकारी संघ ने गहरा रोष प्रकट किया है। संघ ने अपनी कड़ी किंतु सम्मानपूर्ण असहमति दर्ज करवाई है। संगठन ने सांसद के रवैये और टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी है कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होने पर संघ आगामी कड़ा कदम उठाने से गुरेज नहीं करेगा।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गोपी चंद पाठक और महासचिव गौरव धीमान ने संयुक्त बयान में कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा समीक्षा और जवाबदेही तय करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और संघ इसका सम्मान करता है। लेकिन समीक्षा के दौरान अधिकारियों के आत्मसम्मान को प्रभावित करने वाली भाषा-शैली खेदजनक है, जिससे अधिकारियों में निराशा की भावना उत्पन्न हुई है।
सांसद निधि का आंकड़ों से दिया जवाब
समग्र जिले की स्थिति: मंडी जिले में कुल 23 कार्यान्वयन एजेंसियों के अंतर्गत 511.71 लाख रुपये की लागत से 237 कार्य स्वीकृत हैं। इनमें से 155.80 लाख रुपये (28.7%) के 68 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 166.56 लाख रुपये (60.3%) के 143 कार्य प्रगति पर हैं और 189.35 लाख रुपये (11%) के केवल 26 कार्य शुरू नहीं हुए हैं। यानी कुल 211 कार्य पूर्ण या प्रगति पर हैं। कुल 23 एजेंसियों में से केवल 12 बीडीओ कार्यालय हैं।
212 कार्य हैं स्वीकृत
बीडीओ कार्यालयों के तहत 399.59 लाख रुपये के 212 कार्य स्वीकृत हैं। इनमें से 102.76 लाख रुपये (26.9%) के 57 कार्य पूरे हो चुके हैं, 166.06 लाख रुपये (67%) के 142 कार्य प्रगति पर हैं और 130.77 लाख रुपये (6.1%) के केवल 13 कार्य ही अप्रारंभ हैं। इस प्रकार बीडीओ कार्यालयों से जुड़े लगभग 94% स्वीकृत कार्यों पर काम शुरू हो चुका है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही कुल 185.10 लाख की लागत से 72 कार्य स्वीकृत किए गए हैं (अप्रैल में 133.60 लाख के 56 कार्य, जून में 4.00 लाख के 2 कार्य, जुलाई में 33.50 लाख के 12 कार्य और अगस्त में 14.00 लाख के 2 कार्य)। यह कुल स्वीकृत कार्यों का 30.4% और कुल राशि का 36.2% है, जिन्हें मिली अल्प समयावधि के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
विलंब के लिए केवल बीडीओ को जिम्मेदार ठहराना निष्पक्ष नहीं
ई साक्षी पोर्टल पर जियो-टैगिंग, फंड डिस्बर्सल जैसी नई तकनीकी व्यवस्था लागू हुई है, जिसका प्रशिक्षण समय पर नहीं मिल पाया था। इसके अलावा भूमि की उपलब्धता, वन स्वीकृतियां, एनओसी ,न्यायिक प्रकरण और पंचायतों के स्तर पर होने वाले विलंब के लिए केवल बीडीओ को जिम्मेदार ठहराना निष्पक्ष नहीं है।
आपदा के दौरान भी बीडीओ कार्यालयों ने मनरेगा के तहत राहत व बहाली कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा प्रशंसा-पत्र भी प्रदान किया गया था। बीडीओ कार्यालयों के पास केवल सांसद निधि ही नहीं, बल्कि मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, वित्त आयोग, सीएसआर, नाबार्ड तथा कई डिजिटल पोर्टलों एवं शिकायत निवारण का भारी कार्यभार रहता है।
