शिमला। हिमाचल प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव का बिगुल बज गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को सोलन, मंडी, धर्मशाला और पालमपुर नगर निगम सहित 47 नगर पंचायतों और नगर परिषदों में चुनाव की तिथियों की घोषणा की। पहले चरण में केवल निकाय चुनाव की तिथियों की घोषणा की गई है, जबकि पंचायत चुनाव की घोषणा अगले सप्ताह की जाएगी।
राज्य सरकार और कांग्रेस के लिए यह चुनाव मिशन-2027 की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे सेमीफाइनल की तरह देखा जा रहा है। यह चुनाव सरकार और संगठन दोनों के लिए राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विनय कुमार के प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका पहला चुनाव है, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति भी तय होगी। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों के अलावा बोर्ड और निगमों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे नेताओं के लिए यह चुनावी जीत उनकी राजनीतिक शक्ति को बढ़ाएगी, जबकि हार उनकी विफलता को दर्शाएगी।
नगर निगम, जिप व ब्लाक समिति पर ध्यान
नगर निगम के चुनाव पार्टी चुनाव चिह्न पर होंगे। कांग्रेस इन नगर निगमों में महापौर और उपमहापौर अपने पार्टी के नेताओं को बनाना चाहती है। दूसरी ओर पंचायत, जिला परिषद और ब्लाक समिति के चुनाव पार्टी चुनाव चिह्न पर नहीं होते हैं। हर जिले में एक जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनेगा। हालांकि ये चुनाव पार्टी चुनाव चिह्न पर नहीं होते, लेकिन राजनीतिक पार्टियां इन चुनावों में पूरी तरह से शामिल रहती हैं। कांग्रेस पूरी ताकत लगाएगी कि जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर उनकी पार्टी की विचारधारा से संबंधित सदस्य बैठें।
शिमला संसदीय क्षेत्र पर रहेगी पार्टी की नजर
शिमला संसदीय क्षेत्र पर पार्टी की विशेष नजर रहेगी। विधानसभा में वर्तमान में कांग्रेस के 40 और भाजपा के 28 विधायक हैं। शिमला संसदीय क्षेत्र से राज्य सरकार में पांच मंत्री हैं और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी इसी क्षेत्र से हैं। इसके अलावा, बोर्ड और निगमों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की संख्या भी यहां अधिक है। शिमला जिला परिषद के नतीजे सीधे तौर पर कांग्रेस के प्रदर्शन और संगठनात्मक मजबूती को दर्शाएंगे। यदि कांग्रेस यहां कमजोर पड़ती है, तो यह पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विहिमाषय बन सकता है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों आते हैं, जबकि कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से भी कांग्रेस के मंत्रियों और राज्यसभा सदस्य की ताजपोशी हुई है।
मंत्रियों और विधायकों के अतिरिक्त, संगठन के पदाधिकारियों, बोर्ड और निगमों के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को भी चुनावी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पिछले सप्ताह आयोजित बैठक में इस पर चर्चा की गई थी और जल्द ही कमेटियों का गठन किया जाएगा।
-विनय कुमार, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस।
