शिमला। हिमाचल में शहरी निकाय चुनाव में मिली जीत के बाद राज्य सरकार अब गांवों की ओर ध्यान केंद्रित करेगी। चुनावों के लिए लागू आचार संहिता हटने के बाद, सरकार ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम को पुनः प्रारंभ करेगी।
इस कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री स्वयं करेंगे। प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों में जाकर जनता की समस्याओं को सुनकर उनका त्वरित समाधान किया जाएगा। सरकर के स्तर पर इस पर विस्तृत चर्चा की गई है।
मुख्यमंत्री के अतिरिक्त कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों को भी इस कार्य में शामिल किया जाएगा। शहरी निकाय चुनावों में मिली जीत के बाद, सरकार विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट जाएगी। मंत्री गांवों में जाकर जनता दरबार लगाएंगे, जहां प्रत्येक मंत्री और वरिष्ठ विधायक को एक-एक जिला सौंपा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पहले ही निर्णय लिया था कि शासन को जनता के द्वार तक लाया जाएगा। उन्होंने डोडरा क्वार से इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी और इसके बाद कई अन्य स्थानों पर भी दौरे किए। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री का अगला दौरा सिरमौर और कांगड़ा जिले के दूर-दराज क्षेत्रों में हो सकता है, जहां वह जनता की समस्याएं सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे।
मुख्यमंत्री कार्यालय कार्यक्रमों की तिथियों का निर्धारण करेगा, जबकि कैबिनेट मंत्रियों के कार्यक्रमों की तिथि संबंधित जिला के उपायुक्त तय करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान, लोगों की शिकायतों का समाधान मौके पर किया जाएगा, जिससे उन्हें सरकारी कार्यालयों में जाने की आवश्यकता न पड़े।
