चंडीगढ़: करीब 650 करोड़ रुपये के चर्चित बैंक घोटाले के बाद हरियाणा सरकार ने वित्तीय अनुशासन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग ने प्रदेश के सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी कर वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक संचालित सभी डीडीओ (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) बैंक खातों का विस्तृत ब्यौरा एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है। रिपोर्ट हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी दोनों स्वरूपों में वित्त विभाग को भेजनी होगी।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े करीब 650 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में हरियाणा के आठ सरकारी विभागों का नाम सामने आ चुका है। मामले में तीन आईएएस अधिकारियों सहित करीब एक दर्जन अधिकारी और कर्मचारी गिरफ्तार होकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में विभागीय बैंक खातों की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है।
वित्त विभाग ने निर्धारित प्रोफार्मा जारी करते हुए प्रत्येक विभाग से हर वित्तीय वर्ष के अंत तक संचालित डीडीओ बैंक खातों की संख्या, उन खातों के माध्यम से हुए कुल व्यय तथा 31 मार्च तक शेष बची राशि का पूरा विवरण मांगा है। इसके अलावा सरकार ने खर्च के आधार पर खातों का वर्गीकरण भी तलब किया है। इसमें 50 प्रतिशत से कम खर्च वाले खाते, 50 प्रतिशत से अधिक लेकिन 99 प्रतिशत तक खर्च वाले खाते तथा 100 प्रतिशत खर्च वाले खातों की अलग-अलग जानकारी देनी होगी।
सबसे अधिक फोकस उन खातों पर रहेगा, जिनमें पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान कोई खर्च नहीं हुआ। ऐसे खातों के संबंध में विभाग को संबंधित डीडीओ का नाम, पदनाम, विभाग, बैंक का नाम, बैंक खाता संख्या तथा प्रत्येक वित्तीय वर्ष के 31 मार्च तक उपलब्ध क्लोजिंग बैलेंस का विस्तृत रिकॉर्ड देना होगा।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के आंकड़े एक साथ मांगे हैं, ताकि पांच वर्षों के दौरान सरकारी बैंक खातों में हुए लेन-देन, खर्च और बची राशि का तुलनात्मक विश्लेषण किया जा सके। इस कवायद का उद्देश्य सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाना और भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पर प्रभावी अंकुश लगाना माना जा रहा है।
