हमीरपुर: तंजानिया के अरुशा में आयोजित 153वीं इंटर पार्लियामैंटरी यूनियन महासभा के दौरान भारत ने दिव्यांगजनों के अधिकारों और सशक्तिकरण पर अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता को दृढ़ता से रेखांकित किया। सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकतंत्र एवं मानवाधिकार संबंधी स्थायी समिति की चर्चा में भाग लेते हुए भारत का प्रतिनिधित्व किया और मसौदा प्रस्ताव को अधिक व्यावहारिक, संतुलित व अधिकार आधारित बनाने के लिए कुल 17 संशोधन प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के अधिकारों को केवल दान, कल्याण या निष्क्रिय सामाजिक नीति के दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।
यह मौलिक मानवाधिकार, मानवीय गरिमा, समानता और लोकतांत्रिक भागीदारी का विषय है। उन्होंने भारतीय कानून राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज एक्ट, 2016 को वैश्विक विधायी विमर्श में प्रमुखता से रखते हुए कहा कि भारत का व्यापक कानूनी ढांचा गैर भेदभाव, सार्वभौमिक सुगम्यता और समान अवसर को कानूनी अधिकार के रूप में सुनिश्चित करता है, जो विश्व के अन्य देशों के लिए भी एक आदर्श उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि अधिकार केवल कागजों तक सीमित न रहकर पर्याप्त संसाधनों, सुगम संस्थानों व मापने योग्य परिणामों में बदलने चाहिए। उन्होंने संसदीय कूटनीति में भारत की सकारात्मक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत एक ऐसे सुगम, सम्मानजनक व बाधामुक्त विश्व के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां दिव्यांगजन केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि समाज, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र को दिशा देने वाले सक्रिय नेतृत्वकर्त्ता बनें।
