रामपुर: ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शुक्रवार को शिमला जिले के दुर्गम क्षेत्र काशापाठ पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया, मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए ग्रामीणों ने जहां पारंपरिक संस्कृति की झलक पेश की, वहीं स्थानीय महिलाओं ने पहाड़ी स्वाद से सजी खास थाली तैयार कर मेहमाननवाजी की. महिलाओं ने दिनभर मेहनत कर पारंपरिक व्यंजन तैयार किए. काशापाठ पहुंचने पर मुख्यमंत्री का स्वागत स्थानीय बजंतरियों ने पारंपरिक तरीके से बेड़ देकर किया. महिलाओं ने प्राकृतिक फूलों और लोसरू से तैयार की गई फूल मालाओं से मुख्यमंत्री का स्वागत किया. इस दौरान महिलाएं पारंपरिक भेष-भूषा में नजर आईं, जिससे पूरा माहौल हिमाचली संस्कृति के रंग में रंगा दिखाई दिया.
थाली में दिखा पहाड़ी स्वाद
स्थानीय निवासी कमलादेवी ने बताया कि मुख्यमंत्री के लिए तैयार की गई पारंपरिक थाली में स्थानीय मोटे अनाज से तैयार किए गए कई व्यंजन शामिल किए गए हैं. इनमें ओगले के चुड़े, फाफरे के चील्टू, भीतुभात, कौदे की रोटी, तुलसी की खीर और तुलसी की रोटी सहित अन्य पारंपरिक पकवान शामिल किए गए. स्थानीय महिलाओं का कहना है कि इन व्यंजनों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध खान-पान की परंपरा और स्थानीय अनाज की विशेषता को मुख्यमंत्री के सामने रखा गया.
पारंपरिक पहनावे से बढ़ाया स्वागत का मान
मुख्यमंत्री को क्षेत्रवासियों की ओर से ऊन का छुपटा, ऊन का पजामा, ऊनी टोपी और गाची पहनाकर सम्मानित किया गया. वहीं महिलाओं ने भी पारंपरिक परिधान पहनकर कार्यक्रम में भाग लिया. काशापाठ में मुख्यमंत्री के स्वागत के दौरान स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक वाद्य यंत्र, लोक पहनावा और पहाड़ी व्यंजनों का अनूठा संगम देखने को मिला. इससे ग्रामीणों ने अपनी लोक परंपराओं और संस्कृति को मुख्यमंत्री के समक्ष जीवंत रूप में प्रस्तुत किया.
बच्चों के प्रति CM के प्यार और स्नेह से जीता सबका दिल
इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का बच्चों के प्रति खास दुलार भी देखने को मिला. काशापाठ में मौजूद बच्चों से उन्होंने आत्मीयता से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और स्नेहपूर्वक बातचीत की. मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर बच्चे भी काफी उत्साहित नजर आए. मुख्यमंत्री के सामने काशापाठ में छात्राओं ने पारंपरिक नाटी की शानदार प्रस्तुति दी. छात्राओं ने लोक संस्कृति की इस प्रस्तुति के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन अपनाने का संदेश दिया. पारंपरिक वेशभूषा में छात्राओं की नाटी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मन मोह लिया. प्रस्तुति के जरिए छात्राओं ने हिमाचली संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति के खिलाफ जागरूकता का संदेश भी दिया.
