हिसार : हिसार में आज हरियाणा के मुख्यमंत्री वीरवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित दो दिवसीय कृषि मेला (रबी) का शुभारंभ किया। शुभारभ करने के बाद किसानों, कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को संबोधित किया।
उन्होंने इस अवसर पर कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न स्टॉलों पर किसानों के लिए प्रदर्शित नवीनतम कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, कृषि यंत्रों एवं अन्य कृषि उत्पादों की जानकारी ली। कृषि मेले में 300 से अधिक किसानों के लिए स्टॉल लगाई हुई है।जहां किसानों को उचित मूल्यों पर बीज ओर जानकारी मिली।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रदेश में ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, जिनसे कम पानी और कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। सतत् कपास उत्पादन, फसल विविधीकरण और जल संसाधनों का संरक्षण आज की खेती की जरूरत ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित कृषि व्यवस्था का रोडमैप भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि मेला किसानों और वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान एवं तकनीक के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। यहां किसानों को उन्नत रबी बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, मशीनरी, फसल प्रबंधन तथा कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध की जानकारी एक ही स्थान पर मिलती है।
उन्होंने मेले में प्रदर्शित की गई कपास चुगाई की मशीन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मशीन एक घंटे में एक एकड़ की कपास चुगाई करती है और हाथ से चुगाई के मुकाबले में इसमें समय भी आधा लगता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार कपास चुगाई तथा गन्ना छिलाई जैसी मशीनों व इस प्रकार की अन्य तकनीकों को बढावा दे रही है ताकि लेबर की कमी से कपास और गन्ने का बुवाई क्षेत्र कम न हो।
सतत् कपास उत्पादन और बदलती जलवायु के अनुरूप तकनीक विकसित करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कपास हरियाणा की महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है। यह फसल विशेष रूप से सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और आसपास के क्षेत्र में लाखों किसान परिवारों की आजीविका से जुड़ी हुई है। इसलिए इसे हम गर्व से सफेद सोना कहते हैं। हमारे कृषि विश्वविद्यालय और सिरसा स्थित कपास अनुसंधान केंद्र ने नई किस्मों, बेहतर बीज और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन में सराहनीय काम किया है। उन्होंने कहा कि आज कपास की खेती के सामने नई चुनौतियां भी हैं। मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। इसलिए हमें ऐसी कृषि तकनीक और ऐसी बीज किस्मों पर तेजी से काम करना होगा, जो बदलते मौसम और कीटों का बेहतर मुकाबला कर सकें ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने कपास की खेती के लिए ऐसे ही उपायों की जानकारी देने के लिए 257 कपास किसान खेत पाठशालाएं आयोजित की हैं। इनमें 7 हजार से अधिक किसानों को कपास के खेत पर ही कपास की बिजाई से लेकर चुगाई तक हानिकारक कीटों की पहचान करके उनके उत्तम प्रबंधन हेतु अधिक पैदावार लेने के लिए जागरूक किया गया। इसके अलावा, 167 किसान मेलों में कम लागत से कपास उत्पादन करके अधिक मुनाफा कमाने के उपाय बताए गए।
उन्होंने कहा कि इस मेले के थीम का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू फसल विविधीकरण है। पानी है तो खेती है, गांव है और जीवन है। हरियाणा ने देश की खाद्य सुरक्षा में बहुत बड़ा योगदान दिया है, लेकिन हमें अपने भूजल की भी चिंता करनी होगी। हमें ऐसी खेती की ओर बढऩा होगा, जिसमें कम पानी में अधिक और बेहतर उत्पादन हो।
लगातार एक ही प्रकार की फसलें उगाने से मिट्टी की सेहत प्रभावित होती है। परंपरागत रूप से गेहूं व धान उगाने से पानी की खपत ज्यादा होती है, जबकि पूरी दुनिया जल संकट का सामना कर रही है । इसलिए हमें दलहन, तिलहन और कम पानी से उगने वाली फसलों को अपनाना होगा ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए मेरा पानी- मेरी विरासत योजना चलाई हुई है। इस योजना के तहत वैकल्पिक फसलें लेने या खेत खाली छोड़ने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ वित्तीय सहायता दी जाती है। अब तक 2 लाख 34 हजार एकड़ में धान की जगह वैकल्पिक फसलें बोने पर 1 लाख 59 हजार किसानों को 166 करोड़ 34 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य कम पानी में अधिक सिंचाई करना है। इसलिए हम वर्षा जल संचयन, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
माइक्रो इरीगेशन तकनीकों पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। किसानों को तालाब बनाने के लिए भी 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। पानी की बचत के अलावा, इसके दोबारा उपयोग के लिए हमने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के शोधित पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की 27 योजनाएं तैयार की हैं, इनमें से 20 पूरी हो चुकी हैं। इनसे सिंचाई के लिए एक स्थायी जल स्रोत मिलेगा, नहरों पर दबाव कम होगा और भूजल का दोहन भी घटेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल सुरक्षा के साथ-साथ मिट्टी की सेहत की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
हमने किसान के खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच करके 1 करोड़ 6 लाख सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किये हैं। हमने प्रदेश में मिट्टी के नमूनों की जांच के लिए 17 नई मृदा एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न मंडियों में भी 54 नई लघु मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं खोली गई हैं। इसके अलावा, स्कूलों व कॉलेजों में 240 लघु मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। हमने हर खेत-स्वस्थ खेत का पोर्टल भी लॉन्च किया है। इस पोर्टल पर पंजीकरण करवा कर कोई भी किसान अपनी मिट्टी की जांच करवा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में ड्रोन, सेंसर तकनीक, मौसम की डिजिटल जानकारी, सटीक खेती और कृषि स्टार्टअप अब खेती का हिस्सा बन रहे हैं। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार किसानों के साथ बीज से बाजार तक खड़ी है । हमने किसान हित में अनेक ठोस निर्णय लिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने पर आभार व्यक्त किया और कहा कि आज प्रदेश में किसानों की सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को 23 किस्तों में 7 हजार 881 करोड़ 60 लाख रुपये दिए जा चुके हैं।
इसी प्रकार से पिछले 12 सीजन में अब तक 12 लाख किसानों के खातों में फसल खरीद के 1 लाख 85 हजार करोड़ रुपये डाले जा चुके हैं। पिछले 12 सालों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व फसल खराबे के मुआवजे के रूप में भी 16 हजार 160 करोड़ रुपये दिये जा चुके हैं । मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक पोर्टल भी शुरू किया है।
इस पोर्टल पर लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण करवाया है। इसमें से अब तक 44 हजार एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए 23 हजार 930 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है। प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण के लिए कुरुक्षेत्र – गुरुकुल, जींद-हमेटी, सिरसा – मंगियाना और करनाल – घरौंडा में प्रशिक्षण केंद्र खोले हैं। अब तक 12 हजार 188 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हैफेड के माध्यम से प्राकृतिक तरीके से तैयार की गई फसलों को खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि जो ताकत हमारे पुरखों ने हमें दी है, हमें भी प्राकृतिक खेती के माध्यम से वही ताकत हमारे आने वाली पीढिय़ों को देनी होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 से एक एकड़ तक के किसान को देसी गाय पर मिलने वाली सब्सिडी 30 हजार रुपये कर दी गई है। कच्चे माल के भंडारण व प्रसंस्करण के लिए 4 ड्रम खरीदने हेतु प्रत्येक किसान को 3 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2 हजार एकड़ के कलस्टर पर स्मार्ट एग्रीकल्चर नाम से प्राकृतिक खेती शुरू की जाएगी। इसमें यदि किसानों को किसी प्रकार का नुकसान होगा तो उसकी भरपाई हरियाणा सरकार करेगी। उन्होंने बताया कि पीएम कुसुम स्कीम के तहत सोलर पंप लगाने के लिए किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है ।
अब तक 1 लाख 95 हजार 653 सोलर पम्प स्थापित किए जा चुके है। इसी प्रकार से फसल अवशेष प्रबंधन हेतु उपकरणों की खरीद पर अकेले किसान को 50 प्रतिशत अनुदान पर 1 लाख 11 हजार फसल अवशेष प्रबंधन उपकरण व कस्टम हायरिंग सेन्टर पर 80 प्रतिशत सब्सिडी देकर 6 हजार 794 सेंटर स्थापित किये गये। इन पर अब तक 1 हजार 17 करोड रुपये की सब्सिडी दी गई है। पराली के उचित प्रबंधन और गांठ बनाने के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है।
10 लाख किसानों को 909 करोड़ रुपये की राशि सब्सिडी के रूप में दी जा चुकी है। सब्जियों व फलों के लिए भावांतर भरपाई योजना में 21 बागवानी फसलों के संरक्षित मूल्य निर्धारित किए। अब तक 46 हजार किसानों को 247 करोड़ रुपये का भावांतर दिया गया है ।
प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और खाद्य प्रसंस्करण सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 45 किसान सम्मानित
मुख्यमंत्री ने कृषि मेले में प्रदेशभर से आए 45 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इनमें प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी फार्मिंग, मधुमक्खी पालन तथा केंचुआ खाद सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 30 पुरुष एवं 15 महिला किसान शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित किसानों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके प्रयासों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने किया दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन
हरियाणा सरकार द्वारा राज्य में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के परिसर में दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का भी उद्घाटन किया। लगभग 9.94 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुए इस अत्याधुनिक उत्कृष्टता केंद्र का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान और प्रशिक्षण से जोड़ना है।
यह केंद्र प्रदेश के किसानों को रसायन-मुक्त खेती अपनाने, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करने और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक फसलों के उत्पादन में मार्गदर्शन प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगा।
