हमीरपुर। प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कहा है कि हिमाचल में हजारों लोगों ने पानी की स्कीमों के लिए अपनी जमीनें दी हैं।
किसी के खेत में पानी का टैंक बना है और किसी के घर के आंगन से पाइपलाइन गुजरी है। उन गरीब हिमाचलियों को सरकार ने कितना मुआवजा दिया? जब मुख्यमंत्री ने 91 रुपये कनाल के हिसाब से जमीन खरीदी और मुख्यमंत्री बनते ही उसे अपने नाम करवाकर सरकार से ही 10 लाख रुपये कनाल के हिसाब से एक्वायर करवा लिया, तो अन्य प्रभावित लोगों को क्या मिला?
769 कनाल जमीन आज 76 करोड़ की बना ली। शपथ लेने के 20 दिन के अंदर ही अपने परिवार के नाम 18 लाख रुपये का मुआवजा भी ले लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा को शिमला में मुख्यमंत्री कार्यालय बनने पर कोई आपत्ति नहीं है और प्रदेश को विकास भी जरूर चाहिए।
लेकिन आपत्ति इस शाही फिजूलखर्ची पर है। प्रदेश सरकार पौने चार साल में 45 हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी है, जबकि अस्पतालों में पैरासिटामोल और ग्लब्स तक नहीं हैं। आज हिमाचल में आइपीसी या बीएनएस नहीं, सिर्फ ट्रिपल एस यानि सुखविंदर सिंह सुक्खू धारा चल रही है।
विधायक आशीष शर्मा ने जमीन घोटाले पर सवाल पूछा तो उन पर एफआइआर, पत्रकार ने सच लिखा तो उस पर एफआइआर। एफआइआर का तो मजाक बना दिया है।
ऐसा लग रहा है जैसे प्रदेश में सरकार नहीं, छात्र संगठन चल रहा हो। ये चंद दिनों की मेहमान सरकार है। इसे पता चल गया है कि अब जनता इन्हें दोबारा सत्ता में आने का मौका कभी नहीं देगी। सरकार अपने कर्मों से डरी और घबराई हुई है, इतनी विचलित है कि अपनी छटपटाहट और अपनी लूट को एफआइआर के शोर में दबाना चाहती है।
