लखनऊ। ‘चवन्नी और चीनी’ पर अखिलेश यादव और जयन्त चौधरी के बीच बयानों के तीर चलने के बीच 30 अगस्त को लखनऊ में रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष का सम्मेलन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश में विस्तार का लक्ष्य लेकर निकले जयन्त लखनऊ में चुनावी रणनीति को धार देंगे। जेन-जी आंदोलन और आरक्षण को लेकर गरमाई राजनीति के बीच वे यूपी में ब्राह्मणों को साधने निकले हैं।
यह वोटबैंक जहां भाजपा का स्वाभाविक वोटर माना जाता है, वहीं पिछले दिनों सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ के जनेश्वर मिश्रा पार्क में बड़ा ब्राह्मण सम्मेलन किया था।
रालोद पूर्वांचल, मध्य यूपी, बुंदेलखंड क्षेत्र से लेकर पड़ोसी राज्यों में भी पैर जमाने में जुटी है। इससे पहले जयन्त चौधरी 25 नवंबर को लखनऊ आए थे।
राष्ट्रीय लोकदल के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अनुपम मिश्रा ने गुरुवार को प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि केंद्रीय मंत्री जयन्त चौधरी अपने दौरे में गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक विचार-विमर्श करेंगे।
विधानसभा चुनाव के लिहाज से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करने और प्रदेश के सभी क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष, आगामी राजनीतिक दिशा और संगठनात्मक रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण संदेश देंगे।
कहा कि विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के बीच पार्टी की विचारधारा और चौधरी चरण सिंह के सामाजिक न्याय, किसान हित एवं सर्वसमावेशी राजनीति को लेकर सकारात्मक वातावरण बना है। उनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग राष्ट्रीय लोकदल से जुड़ रहे हैं।
ब्राह्मण समाज के साथ सवर्ण समाज के कई प्रमुख राजनीतिक एवं सामाजिक चेहरे राष्ट्रीय लोकदल की सदस्यता ग्रहण करेंगे। कार्यकर्ता एवं समर्थक बड़ी संख्या में लखनऊ पहुंचेंगे। हाल में क्षेत्रीय अध्यक्षों की बैठक कर उनकी लिखित परीक्षा कराई गई।
