शिमला। हिमकेयर में एक हजार करोड़ की देनदारी छोड़ गए और सौ कराेड़ का इसमें घोटला हुआ है। जबकि सहारा योजना में जिन्हें सहारा याेजना की आवश्यकता नहीं थी उन्हें सहारा दे दिया। वर्तमान में तीन हजार पात्र लोगों को सहारा में लाभ मिल रहा है।
ये बात मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नियम 130 के तहत स्वास्थ्य को लेकर चल रही चर्चा के दौरान हस्तक्षेप करते हुए कही। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार में अपात्रों को सहारा में लाभ दिया जा रहा था। यदि पात्र थे तो पोर्टल खाली क्यों आवेदन क्यों नहीं कर रहे।
स्वास्थ्य विभाग के स्थान पर अब समाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सहारा योजना सौंपी है। अब वास्तविक पात्र लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं ली जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमकेयर योजना बंद नहीं हुई है और पात्र लोगों को इसका लगातार लाभ मिल रहा है।उन्होंने पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमकेयर के तहत अस्पतालों और अन्य देनदारियों का करीब एक हजार करोड़ रुपये का एरियर मौजूदा सरकार पर छोड़ा गया।
चुकाया जाएगा कार्ड धारक का खर्च
इसमें 100 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।जिसकी विजिलेंस जांच चल रही है।उन्होंने दावा किया कि जांच में गड़बड़ियों की परतें जल्द खुलेंगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य योजनाओं का लाभ वास्तविक और पात्र लोगों तक पहुंचाना है। अभी तक पुरानी देनदारियां चुकता की जा रही थी।
अब पुरानी देनदारियां नहीं जो अब कार्ड धारक का खर्च होगा उसे चुकाया जाएगा। पात्र लोगों के लिए साल में चार बार हिमकेयर कार्ड बनाए जा रहे हैं। अस्पताल पहुंचने वाले जरूरतमंद मरीज को योजना का लाभ देने में देरी न हो, इसके लिए वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षकों और मेडिकल कालेजों के प्रिंसिपल को 100-100 कार्ड बनाने की शक्तियां दी गई हैं।
चंद्रशेर बोले- नेर चौक में अंदर लिखवाते रहे
चंद्रशेखर ने कहा कि हिमकेयर में नेर चौक मेडिकल कालेज में अंदर सीटी स्कैन लिखवाते रहे और निजी लैब वाले कमाते रहे।ऐसे सब कुछ चलता रहा। मेडिकल कालेज में सुविधाएं ही नहीं थी। मुख्यमंत्री के भी अतने बड़े-बडे बोर्ड नहीं होते जितने इन निजी लैब अैर अस्पतालों वालों ने लगाए थे। अब बेहतर उपचार मिल रहा है।
टांडा लोअर हिमाचल की लाइफलाइन
पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आरएस बाली ने कहा कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर काम किया, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पहले दिन से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार का लक्ष्य बनाया। टांडा मेडिकल कालेज लोअर हिमाचल की लाइफलाइन है।
कभी टीवी सेनेटोरियम रहा टांडा अब सालाना करीब छह लाख ओपीडी और 50 हजार आइपीडी मरीजों का इलाज करता है। इनमें करीब 40 हजार मरीजों की सर्जरी होती है। टांडा में 225 रोबोटिक सर्जरी हो चुकी हैं।
यहां किडनी ट्रांसप्लांट, ओपन हार्ट सर्जरी, कार्डियक सर्जरी और एडवांस आइसीयू जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।उन्होंने हिमकेयर को मजबूत करने और सहारा योजना की राशि समय पर देने की जरूरत भी बताई।
