देहरादून: उत्तराखंड में सहकारिता के क्षेत्र को नई दिशा और व्यापक स्वरूप देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति- 2026 को मंजूरी मिल दी गई. ये नीति प्रदेश में सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास, स्थानीय उद्यमिता, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए अगले दशक का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करेगी.
उत्तराखंड की नई नीति को राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 के तहत उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है. पर्वतीय क्षेत्रों की छोटी एवं सीमांत जोतें (कृषि भूमि), बिखरी ग्रामीण आबादी, पलायन, सीमित औद्योगिकीकरण, जलवायु परिवर्तन और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं की सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सहकारिता को सिर्फ लोन वितरण की व्यवस्था न मानकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्यमिता की मजबूत आधारशिला बनाने की परिकल्पना की गई है.
उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति- 2026 को सात प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित किया गया है. जिसमें, नींव का सशक्तिकरण, सहकारी संस्थाओं की जीवंतता, भविष्य के लिए तैयारी, समावेशिता एवं पहुंच का विस्तार, नए एवं उभरते क्षेत्रों में सहकारिता, युवा पीढ़ी को सहकारिता से जोड़ना और आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण शामिल है. राष्ट्रीय सहकारी नीति के रणनीतिक दृष्टिकोण को उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुसार विस्तार देते हुए राज्य ने आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण को विशेष प्राथमिकता दी है.
ग्रामीण सेवाओं को सहकारिता से जोड़ने पर काम: नई नीति के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी PACS को सिर्फ लोन उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय, आत्मनिर्भर और व्यावसायिक ग्रामीण आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा. इसके जरिए कृषि, डेयरी, बागवानी, मत्स्य, भंडारण, कोल्ड-चेन, प्राथमिक प्रसंस्करण, कृषि यंत्र किराया, बीमा, पेंशन, डिजिटल बैंकिंग और अन्य ग्रामीण सेवाओं को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा.
सहकारी समितियां और सहायता समूहों पर फोकस: हिमालयी उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए छोटे सहकारी उद्यमों को क्लस्टर मॉडल से जोड़ने पर भी विशेष जोर रहेगा. नीति में महिला और युवा भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी गई है. हर जिले में महिला सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने, स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण एवं बाजार से जोड़ने और युवाओं के लिए सहकारी स्टार्टअप, इंटर्नशिप, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा तय की गई है.
पर्यटन पर बढ़ेगा कदम: सहकारिता को युवाओं के लिए सम्मानजनक एवं आकर्षक करियर विकल्प बनाने के लिए प्रशिक्षण, शोध, प्रबंधन एवं आधुनिक कौशल विकास तंत्र को मजबूत किया जाएगा. नई नीति सहकारिता को पारंपरिक कृषि और ऋण व्यवस्था से आगे ले जाने पर जोर देती है. इसके तहत सहकारी पर्यटन, होम-स्टे नेटवर्क, इको-टूरिज्म, एग्रो-टूरिज्म, आयुष, सौर ऊर्जा, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, कार्बन क्रेडिट, वन आधारित उत्पाद, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, स्वास्थ्य सेवाएं, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट लॉजिस्टिक्स, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहकारी मॉडल विकसित किए जाएंगे.
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: राज्य-विशिष्ट पहल के रूप में सहकार टैक्सी के जरिए सदस्य-स्वामित्व वाली परिवहन सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की दिशा भी नीति में शामिल की गई है. वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को सहकारिता से जोड़ते हुए सीमांत एवं पर्वतीय गांवों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार और उद्यम विकसित किए जाएंगे. इसका उद्देश्य गांव में उत्पादित वस्तुओं का स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन कर उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है. हब एंड स्पोक मॉडल के जरिए पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में सहकारी सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत किया जाएगा.
नीति के तहत सहकारी संस्थाओं में कागज रहित कार्यप्रणाली, रियल-टाइम लेखांकन, डिजिटल बैंकिंग, नियमित वित्तीय एवं सामाजिक ऑडिट, पेशेवर प्रबंधन और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा दिया जाएगा. जिला सहकारी बैंकों में क्लाउड सीबीएस, PACS-बैंक एकीकरण और मोबाइल-फर्स्ट डिजिटल बैंकिंग जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं की दिशा में भी कार्य किया जाएगा.
3 चरणों में रोडमैप: उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति- 2026 के तहत साल 2026 से 2036 तक तीन चरणों में रोडमैप लागू किया जाएगा. पहले चरण के तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2026- 27 में विधिक सुधार, एमआईएस, प्रशिक्षण, संस्थागत ढांचे और डिजिटलीकरण पर फोकस किया जाएगा. दूसरे चरण यानी साल 2028- 31 के बीच ग्राम पंचायत स्तर तक सहकारी सेवाओं का विस्तार, मूल्य-श्रृंखला आधारित क्लस्टर तथा बहुउद्देशीय सहकारी सेवा नेटवर्क का विकास किया जाएगा. इसके बाद आखिरी चरण यानी साल 2032- 36 तक उत्तराखंड को पर्वतीय सहकारी उद्यमों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना, औषधीय उत्पाद, हस्तशिल्प, दुग्ध, मत्स्य एवं अन्य हिमालयी उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है.
साल 2030 तक सहकारिता के क्षेत्र में व्यापक बदलाव का लक्ष्य भी रखा गया है. नीति के जरिए राज्य में सशक्त एमपीएसीएस नेटवर्क, डिजिटल सहकारी इकोसिस्टम, महिला एवं युवा नेतृत्व में वृद्धि, सीमांत क्षेत्रों में रोजगार सृजन, पलायन में कमी और सहकारिता आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विस्तार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला एवं विभागीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था के साथ डिजिटल डैशबोर्ड और केपीआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा.
उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026, प्रदेश के सहकारी आंदोलन को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम है. सहकारिता अब केवल संस्थाओं के संचालन और ऋण वितरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह उत्तराखंड के गांवों की आर्थिक शक्ति बनेगी. सरकार क प्राथमिकता है कि किसान को बाजार, महिला को उद्यम, युवा को रोजगार और गांव को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जाए. उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां देश के अन्य राज्यों से अलग है. ऐसे में राज्य की सहकारी नीति में पर्वतीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं, स्थानीय संसाधनों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को केंद्र में रखा गया है.
-डॉ. धन सिंह रावत, सहकारिता मंत्री-
सहकारिता मंत्री ने कहा कि, नई नीति के जरिए PACS को बहुउद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. महिलाओं और युवाओं को सहकारिता के नेतृत्व से जोड़ा जाएगा और कृषि के साथ पर्यटन, होम-स्टे, ऊर्जा, आयुष, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, ड्रोन, तकनीक और अन्य नए क्षेत्रों में सहकारी मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा. डिजिटल तकनीक और पारदर्शिता को नई सहकारी व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के पर्वतीय एवं सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यम के अवसर बढ़ेंगे और पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी.
