लखनऊ। आमजन को घर के पास पारदर्शी, सुरक्षित तथा समयबद्ध डिजिटल सेवाएं मुहैया कराने के लिए सरकार ने जन सेवा केंद्र (सीएससी)- 4.0 परियोजना लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जिले में दो जिला सेवा प्रदाता (डिस्ट्रिक्ट सर्विस प्रोवाइडर/डीएसपी) का चयन खुली व प्रतिस्पर्धात्मक ई-निविदा के माध्यम से किया जाएगा। प्रत्येक जिला सेवा प्रदाता द्वारा शहरी क्षेत्र में प्रति 10 हजार की जनसंख्या पर एक तथा ग्रामीण क्षेत्र में प्रति ग्राम पंचायत न्यूनतम दो जन सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
वर्तमान में जन सेवा केंद्रों से 54 विभागों की 359 शासकीय सेवाएं आनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। चयनित सेवा प्रदाता जिले में डिजिटल सेवाओं की व्यवस्था को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और गुणवत्तापूर्ण बनाने का काम करेंगे। यह परियोजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित होगी।
मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य में जन सेवा केंद्र 4.0 परियोजना के क्रियान्वयन व संचालन से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। चयनित डीएसपी द्वारा जिला ई-गवर्नेंस सोसाइटी (डीईजीएस) के साथ मास्टर सर्विस एग्रीमेंट किया जाएगा। साथ ही परियोजना के प्रभावी संचालन मानक संचालन प्रक्रिया, जुर्माना आदि निर्धारित किए जाएंगे।
डीएसपी द्वारा प्रत्येक ग्राम सचिवालय में पंचायत सहायक द्वारा संचालित किए जाने वाले जन सेवा केंद्र को स्थापित किया जाएगा। परियोजना की अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है।
जिला ई गर्वर्नेंस सोसाइटी और डीएसपी की सहमति से इसे अधिकतम दो वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकेगा। वर्तमान में कार्यरत केंद्रों की सेवाएं जारी रखना सुनिश्चित किया जाएगा।
सीएससी-4.0 की निगरानी राज्य स्तर पर सेंटर फार ई-गवर्नेंस सोसाइटी तथा जिला स्तर पर ई-गवर्नेंस सोसाइटी करेगी। शिकायतों के निस्तारण के लिए पोर्टल विकसित किया जाएगा। प्रत्येक डीएसपी द्वारा जिला स्तर पर हेल्प डेस्क भी स्थापित की जाएगी।
