शिमला। कृषि मंत्री चंद्र कुमार के पुत्र पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती ने सरकार द्वारा शुरू की जा रही लाटरी पर पुर्नविचार करने का मामला उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सहित समूची मंत्री परिषद को लिखे गए पत्र में लाटरी के संबंध में एक बार फिर से विचार करने का आग्रह किया है।
उन्होंने 27 साल बाद आनलाइन और आफलाइन लाटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की सरकारी कवायद का विरोध किया है। पत्र में चिंता जताई गई है कि प्रदेश पहले से ही चिट्टे और नशे के गंभीर संकट से जूझ रहा है।
ऐसे दौर में युवाओं के स्मार्टफोन तक डिजिटल लाटरी और क्विक मनी का लालच पहुंचाना एक और सामाजिक आपदा को न्योता देने जैसा है। लाटरी को पेपर टिकट के साथ-साथ आनलाइन माध्यम (स्मार्टफोन) पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह रद किया जाए
नीरज भारती का कहना है कि यह केवल टिकट खरीदने वाले तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि इसका सीधा असर आम परिवारों की बचत, माताओं-बहनों की घरेलू सुरक्षा और बुजुर्ग पेंशनरों की गाढ़ी कमाई पर पड़ेगा। सरकार से मांग की गई है कि राजस्व जुटाने के लिए सामाजिक ताने-बाने को दांव पर लगाने के बजाय टिकाऊ और सम्मानजनक विकल्प तलाशे जाएं तथा 14 सितंबर से पहले इस टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह रद किया जाए।
उन्होंने पत्र के जरिये अपील करते हुए याद दिलाया गया है कि वर्ष 1999 में तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने जनहित में लाटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद लगातार आर्थिक चुनौतियों के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री स्व. राजा वीरभद्र सिंह और जयराम ठाकुर की सरकारों ने भी 27 वर्षों तक लाटरी को दोबारा शुरू नहीं होने दिया।
युवाओं के लिए बेहद घातक
उनका कहना है कि नशे के संकट के बीच डिजिटल युवाओं को चिट्टे के बाद लाटरी का दोहरा झटका लगने वाला है। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा सालाना 100 करोड़ के राजस्व की उम्मीद में जारी किए गए ई-टेंडर को तत्काल प्रभाव से रद किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और कैबिनेट मंत्रियों को भेजे गए अपील पत्र में इस फैसले को युवाओं और आम परिवारों के भविष्य के लिए बेहद घातक बताया गया है।
