बिलासपुर। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सुक्खू ने बुधवार को बिलासपुर जिले में मछुआरा सम्मान निधि योजना की शुरुआत की। झंडूता के धराड़सानी में मछुआरा सम्मेलन में सुक्खू ने कहा कि इस योजना से लगभग 1500 मछुआरों को लाभ होगा।
योजना के तहत दो माह तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध (16 जून से 15 अगस्त) की अवधि में पात्र मछुआरों को 3,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सुक्खू ने घोषणा की कि मछली कोल्ड स्टोर बनाने के लिए सरकार 70 की जगह 80 प्रतिशत सब्सिडी देगी। मछली सप्लाई वैन खरीद पर भी 70 प्रतिशत सब्सिडी देने की घोषणा।
जागरण संवाददाता, बिलासपुर। नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार मछुआरों को आर्थिक रूप से सहयोग करने का प्रयास कर रही है। इसी के तहत मछुआरा समितियों पर लगाए गए पांच गुना जुर्माना सरकार ने माफ कर दिया है। इसके अलावा अगर कोई मछुआरा कोल्ड स्टोरेज इकाई स्थापित करना चाहता है तो उसे अब 70 की बजाए 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को बिलासपुर के धराड़सानी में आयोजित मछुआरा सम्मान समारोह में यह घोषणा कीं।
इसके अलावा उन्होंने पूरे प्रदेश में मछुआरों को लाइफ जैकेट उपलब्ध करवाने के लिए 50 लाख रुपये तथा मछुआरों के लिए लैंडिंग सुविधाएं विकसित करने के लिए 10 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उत्पादित मछलियों को दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार रेफ्रिजरेटेड वाहनों की खरीद पर 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना शुरू करने को लेकर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में प्रमुख जलाशयों से मछली पकड़ने वाले 1500 मछुआरों को 3,500 रुपये प्रति लाभार्थी की दर से कुल 52.50 लाख रुपये की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से हस्तांतरित की। मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दो माह में यह राशि हर साल दी जाएगी। हालांकि पंजीकृत मछुआरे 1700 हैं, लेकिन योजना के तहत सभी के दस्तावेज पूरे नहीं हुए हैं, जिसमें अधिकतर ने जमीन की नकल नहीं दी थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन आकांक्षाओं को सुनना और उसी के अनुरूप नीतियां बनाना ही ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का वास्तविक सार व ध्येय है। भाजपा सरकार के दौरान हिमाचल प्रदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में देश में 21वें स्थान पर खिसक गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के दृढ़ प्रयासों के कारण हिमाचल प्रदेश अब विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के मामले में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।
प्रदेश सरकार आपदा प्रभावित परिवारों को अपने संसाधनों से आठ लाख रुपये की सहायता भी प्रदान कर रही है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि जनता के धन का उपयोग लोगों के कल्याण के लिए हो। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने भ्रष्टाचार द्वारा संपत्ति अर्जित की है तो सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी।
उन्होंने लोगों से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने का भी आह्वान किया। इससे पूर्व तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि आज का दिन प्रदेश में मछुआरों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत है।
सामाजिक कल्याण में उपयोग होगा पेट्रोल-डीजल पर लगाया सेस
पेट्रोल और डीजल के दामों में की गई बढ़ोतरी एवं लगाए गए सेस पर सीएम ने कहा कि इसका सीधा लाभ प्रदेश असहाय व विधवा महिलाओं और उनके बच्चों को मिलेगा। इस राशि का इस्तेमाल उनके बच्चों की बेहतर शिक्षा और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।
निर्णय से पहले पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में ईंधन की कीमतों का विश्लेषण किया गया था। सेस लागू होने के बाद भी हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड की तुलना में करीब 60 से 70 पैसे प्रति लीटर कम हैं।
