शिमला। पेट्रोल-डीजल पर सरकार की ओर से लगाए गए 60 पैसे प्रति लीटर सेस को लेकर प्रदेश के निजी बस और टैक्सी आपरेटरों में रोष है। आपरेटरों का कहना है कि पहले से घाटे में चल रहे निजी परिवहन कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया गया है। इसका असर आम वाहन मालिकों के साथ निजी बस और टैक्सी ऑपरेटरों पर भी पड़ेगा।
बस एंड कार कन्फेडरेशन आफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष मनोज राणा और हिमाचल निजी बस आपरेटर संघ के महासचिव रमेश कमल ने कहा कि सेस से एक निजी बस आपरेटर का रोजाना करीब 150 रुपये और मासिक लगभग 4500 रुपये खर्च बढ़ गया है। सेस लागू होने के बाद शिमला में पेट्रोल 103.27 रुपये और डीजल 95.21 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
निजी बस और टैक्सी आपरेटरों ने सरकार से अगले 10 दिन में मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री तथा वित्त एवं परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि बैठक महज औपचारिकता न हो, बल्कि निजी परिवहन कारोबार को संकट से उबारने के लिए समयबद्ध और ठोस फैसले लिए जाएं।
आपरेटरों के अनुसार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में डीजल पर पहले तीन रुपये प्रति लीटर वैट बढ़ाया गया। प्राकृतिक आपदा के नाम पर फिर तीन रुपये की बढ़ोतरी हुई।
युद्ध की परिस्थितियों के दौरान डीजल की कीमत में करीब आठ रुपये प्रति लीटर की वृद्धि का अतिरिक्त बोझ पड़ा और अब 60 पैसे प्रति लीटर सेस लगाया गया है। इससे निजी परिवहन क्षेत्र की लागत लगातार बढ़ रही है।
