
गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से लाइसेंस के लिए आवेदन किए जाने के बाद हरियाणा में बिजली क्षेत्र के निजीकरण को लेकर बहस तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने इसे बिजली विभाग के निजीकरण की दिशा में कदम बताते हुए विरोध जताया है। वहीं विपक्ष भी सरकार पर सवाल उठा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर बिजली विभाग के कर्मचारियों ने पिछले दिनों तीन दिन की हड़ताल की थी। बाद में ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ हुई बातचीत के बाद हड़ताल को किसी तरह समाप्त कराया गया। अब हरियाणा विद्युत नियामक आयोग यानी HERC की ओर से मामले पर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद विवाद को लेकर तस्वीर कुछ साफ हुई है। HERC के कार्यवाहक चेयरमैन मुकेश गर्ग ने कहा है कि किसी निजी कंपनी का बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन करना अपने आप में बिजली व्यवस्था के निजीकरण का प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत कोई भी थर्ड पार्टी बिजली वितरण का लाइसेंस हासिल करने के लिए नियामक आयोग के समक्ष आवेदन कर सकती है।
इसी कानूनी प्रावधान के तहत इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए लाइसेंस की मांग की है। कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम यानी DHBVN के साथ बिजली वितरण के क्षेत्र में प्रवेश करना चाहती है। मुकेश गर्ग के मुताबिक, फिलहाल आयोग कंपनी के आवेदन की जांच कर रहा है। कंपनी की क्षमता, काम करने की योग्यता और उसके प्रस्ताव से सरकार, सरकारी डिस्कॉम और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि यदि कंपनी को लाइसेंस मिल भी जाता है तो DHBVN का काम बंद नहीं होगा। सरकारी बिजली वितरण निगम पहले की तरह अपनी सेवाएं जारी रखेगा। ऐसी स्थिति में सरकारी डिस्कॉम के साथ निजी कंपनी भी बिजली वितरण के क्षेत्र में काम कर सकती है।
मुकेश गर्ग ने बताया कि ऐसी व्यवस्था में उपभोक्ताओं के पास सेवा प्रदाता चुनने का विकल्प हो सकता है। हालांकि बिजली की दरें निजी कंपनी अपनी मर्जी से तय नहीं कर पाएगी। टैरिफ निर्धारित करने का अधिकार HERC के पास रहेगा और नियामक आयोग के नियमों के अनुसार ही बिजली की दरें तय होंगी। निजी कंपनी के प्रस्ताव के विरोध में कर्मचारी संगठनों की ओर से नौकरी जाने की आशंका भी जताई गई है। इस पर HERC के कार्यवाहक चेयरमैन ने कर्मचारियों से कहा कि उन्हें नौकरी जाने को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के कई शहरों में बिजली वितरण की अलग-अलग व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इलेवन पावर ने केवल कम लाइन लॉस वाले गुरुग्राम के लिए आवेदन नहीं किया है, बल्कि अपेक्षाकृत अधिक लाइन लॉस वाले नूंह में भी बिजली वितरण के लिए लाइसेंस मांगा है। इसलिए कंपनी के प्रस्ताव को केवल फायदे वाले इलाकों में निजी कंपनियों के प्रवेश के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।
मामले की जांच के लिए HERC ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी कंपनी की कैपेसिटी, कैपेबिलिटी और प्रस्तावित व्यवस्था के संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रही है। कमेटी यह भी देख रही है कि इसका सरकार, डिस्कॉम और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक और प्रशासनिक प्रभाव क्या होगा। आयोग ने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों को अपनी आपत्तियां और सुझाव रखने का अवसर भी दिया है। कर्मचारी यूनियनों ने भी इस प्रक्रिया में अपनी बात रखी है। फिलहाल आयोग को कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है और रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई या निर्णय लिया जाएगा। सरकारी राजस्व को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी HERC ने स्थिति स्पष्ट की है। मुकेश गर्ग ने कहा कि इन सभी पहलुओं का अध्ययन कमेटी कर रही है। अंतिम निर्णय तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।
किसानों को रियायती दरों पर बिजली मिलने के मुद्दे पर भी उन्होंने कहा कि किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी की भरपाई सरकार की ओर से की जाती है। इसलिए इस व्यवस्था को सीधे तौर पर डिस्कॉम के वित्तीय नुकसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मुकेश गर्ग ने यह भी बताया कि इलेवन पावर के अलावा एक अन्य कंपनी की याचिका भी HERC के पास पहुंची है। आयोग दोनों प्रस्तावों पर कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार विचार कर रहा है। किसी भी कंपनी को लेकर फैसला संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल हरियाणा में बिजली वितरण के संभावित नए मॉडल को लेकर कर्मचारी संगठनों, सरकार और विपक्ष के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है। HERC का कहना है कि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आयोग का फैसला कमेटी की रिपोर्ट, कानूनी प्रावधानों और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
