देहरादून: उत्तराखंड में तकनीकी शिक्षा के अंतर्गत परीक्षाओं को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है. इसके तहत विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय प्रशासन की परीक्षाओं को लेकर जिम्मेदारी तय की गई है. जिसमें कुलपति से लेकर कुल सचिव और परीक्षा नियंत्रक को इसके लिए जिम्मेदार बनाया गया है. जानिए तकनीकी शिक्षा के अंतर्गत परीक्षा बैठक के दौरान क्या दिए गए निर्णय और किस तरह के रहे निर्देश?
उत्तराखंड के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी, लंबे समय से रिक्त पदों और निर्माण कार्यों में देरी का असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने की आशंका के बीच विभाग ने व्यवस्थाओं में सुधार के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों में 480 गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति का प्रस्ताव करीब एक माह से शासन स्तर पर लंबित है.
वहीं, विभिन्न तकनीकी संस्थानों में चल रहे निर्माण कार्य भी निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं हो पाए हैं. इन मुद्दों के साथ ही परीक्षा व्यवस्था, शैक्षणिक कैलेंडर और शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई. तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सामने आया कि पॉलीटेक्निक संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 480 गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है.
नियुक्ति प्रक्रिया में देरी से संस्थानों में नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है. इसे देखते हुए अधिकारियों को प्रस्ताव पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, ताकि छात्रों की पढ़ाई पर इसका असर न पड़े. बैठक में तकनीकी शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से रिक्त चल रहे शैक्षणिक और शिक्षणेत्तर पदों का मुद्दा भी सामने आया। इन पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए गए हैं.
तकनीकी शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता सीधे तौर पर कक्षाओं के संचालन, प्रयोगात्मक प्रशिक्षण और छात्रों को तकनीकी कौशल उपलब्ध कराने से जुड़ी है. ऐसे में रिक्त पदों को भरना विभाग के सामने प्रमुख चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. तकनीकी शिक्षा की शैक्षणिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए संस्थानों में शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने के निर्देश भी दिए गए. इसका उद्देश्य कक्षाओं, परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित करना है.
इसके अलावा शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) कैलेंडर लागू करने की बात कही गई है. इसके तहत शिक्षकों को देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जानी है, जिससे वे नई तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित हो सकें.
परीक्षा प्रबंधन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी तय: इस दौरान परीक्षा प्रबंधन को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया गया. विश्वविद्यालयों के अधीन संचालित संस्थानों में परीक्षाओं को पारदर्शी और गोपनीय तरीके से आयोजित कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए.
इनकी होगी जवाबदेही: बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय होगी. कुलपति, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक को परीक्षा व्यवस्था के लिए जिम्मेदार माना जाएगा और अनियमितता की स्थिति में नकल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान लागू हो सकता है.
तकनीकी संस्थानों में शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की स्थिति भी बैठक के एजेंडे में रही. राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों और प्रौद्योगिकी संस्थानों में चल रहे निर्माण कार्यों की संस्थानवार समीक्षा की गई. विभिन्न संस्थानों में भवनों और अन्य निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई. निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.
निर्माण कार्यों में देरी का सीधा असर छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है. नए भवन, प्रयोगशालाएं और अन्य आधारभूत सुविधाएं समय पर तैयार नहीं होने से संस्थानों की क्षमता और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं. इसी को देखते हुए लंबित निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया. तय समय सीमा में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करने की बात भी कही गई.
बैठक में निदेशक तकनीकी शिक्षा और विभिन्न राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के अधिकारियों ने अपने-अपने संस्थानों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी साझा की. गोपेश्वर, उत्तरकाशी, टिहरी, पंतनगर, टनकपुर और पिथौरागढ़ समेत पौड़ी और अल्मोड़ा के संस्थानों में चल रहे कार्यों की स्थिति की समीक्षा की गई.
