चंडीगढ़। हरियाणा को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में तैयार की गई महत्वाकांक्षी ‘जल संरक्षित हरियाणा’ (वाटर सिक्योर हरियाणा) परियोजना को विश्व बैंक की मंजूरी मिल गई है।
कुल 5714 करोड़ रुपये की इस परियोजना में 4000 करोड़ रुपये का ऋण विश्व बैंक उपलब्ध कराएगा। परियोजना में राज्य को 15 क्लस्टरों में बांटा गया है, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 48.94 लाख एकड़ है।
शनिवार को परियोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल प्रबंधन की ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं, जिनका लाभ सीधे खेतों और किसानों तक पहुंचे। प्रदेश में पानी की प्रत्येक बूंद का संरक्षण और उसका प्रभावी उपयोग सरकार की प्राथमिकता है।
इसके लिए डिजिटल वाटर मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जाए, जिससे जल बजट, उपलब्धता और उपयोग की वास्तविक समय में निगरानी की जा सके। बैठक में सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी भी शामिल हुईं।
गांव स्तर पर बनेंगी जल समितियां, खालों के रखरखाव में होगी भागीदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के लिए गांव स्तर पर जल समितियों का गठन किया जाएगा। नहरी खालों (वाटर कोर्सेस) के निर्माण और रखरखाव में इन समितियों को सहभागी बनाया जाएगा। इसके लिए एक अलग कोष बनाया जाएगा, जिसमें सरकार भी वित्तीय योगदान देगी।
छह वर्षों में बदलेगा हरियाणा का जल प्रबंधन ढांचा
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह परियोजना वर्ष 2026 से 2032 तक छह वर्षों में चरणबद्ध ढंग से लागू होगी। इसके तहत राज्य की शेष 678 नहरों के पुनर्वास का लक्ष्य रखा गया है। इनमें विश्व बैंक के सहयोग से 106 नहरों पर 2,484.87 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि 293 नहरों का पुनर्वास राज्य बजट से और 279 नहरों का पुनर्वास नाबार्ड की सहायता से किया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत मिकाडा द्वारा 620 वाटर कोर्सेस (खालों) का पुनरुद्धार किया जाएगा, जिससे 3.18 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। साथ ही 120 कैनाल आधारित माइक्रो इरीगेशन परियोजनाएं लागू की जाएंगी, जिनसे 56,830 एकड़ क्षेत्र को लाभ पहुंचेगा।
जलभराव का समाधान, फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री के अनुसार योजना के तहत दो लाख एकड़ जलभराव प्रभावित भूमि का सुधार किया जाएगा। इसके अलावा पांच लाख एकड़ क्षेत्र में सीधी धान बुवाई (डीएसआर) तथा 1.12 लाख एकड़ भूमि पर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य कम पानी वाली और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देकर भूजल दोहन को कम करना है।
‘जल प्रबंधन में आदर्श बदलाव’ बनेगी परियोजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बैंक ने हमारी दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना को जल संसाधन प्रबंधन में “आदर्श बदलाव” बताया है। परियोजना के पूर्ण होने पर राज्य की सभी नहरों का पुनर्वास संभव होगा और हरियाणा जल सुरक्षा का मजबूत व स्थायी मॉडल बन जाएगा।
सात जिलों में 28 हजार एकड़ भूमि को होगा सिंचाई लाभ
भूजल स्तर सुधारने के लिए भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा जिलों में 147 नई वाटर बाडी विकसित की जाएंगी। इससे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को मजबूती मिलेगी।
इसके अतिरिक्त जींद में दो, कैथल में एक तथा गुरुग्राम के धनवापुर में एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस पहल से करीब 28 हजार एकड़ भूमि को सिंचाई लाभमिलेगा और इस पर 282.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
