लखनऊ। पावर कारपोरेशन प्रबंधन पिछले 14 माह से गलत फार्मूले के आधार पर विद्युत उपभोक्ताओं से ईंधन अधिभार वसूलता रहा है। विद्युत नियामक आयोग ने इस पर नाराजगी जताते हुए प्रबंधन को किसी तरह की गलती न कर, कानून के दायरे में रहते हुए कार्य करने की हिदायत दी। आयोग ने स्पष्ट तौर पर कहा कि किसी भी माह में बिजली खरीदने व ट्रांसमिशन (पारेषण) शुल्क के आधार पर ही ईधन अधिभार तय कर उपभोक्ताओं से वसूला जा सकता है।
किसी भी दूसरे माह की देनदारी या फिर समायोजन को अधिभार तय करने के फार्मूले में शामिल नहीं किया जा सकता है। आयोग के संबंधित आदेश से साफ है कि उपभोक्ताओं को भारी-भरकम ईंधन अधिभार से राहत मिलेगी। अधिभार के एवज में मई के बिल के साथ जून में 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली जा रही धनराशि भी अगले माह के बिल में समायोजित की जा सकती है।
इस संबंध में कारपोरेशन प्रबंधन पहले ही कह चुका है कि आयोग का निर्णय उसे स्वीकार होगा। हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि दिल्ली सहित अन्य कई राज्यों में फ्यूल एवं पावर परचेज कास्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) की गणना जिस तरह से की जा रही है उसी तरह से जून व उससे पहले यहां भी किया जाता रहा है।
आयोग में प्रस्ताव किया दाखिल
जून में उपभोक्ताओं से भारी-भरकम 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलने के आदेश पर विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आपत्ति उठाते हुए आयोग में प्रस्ताव दाखिल किया था। वर्मा का कहना था कि मार्च की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ-साथ लगभग 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाया दावों एवं पूर्व अवधि की देनदारियों को भी जोड़ दिया गया जो कि कानून और नियामकीय व्यवस्था के विपरीत है।
इस पर आयोग की नोटिस के जवाब में कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक नीतीश कुमार की ओर से 19 जून को दाखिल किए गए जवाब में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलने को उचित ठहराया गया था। आयोग द्वारा मंगलवार को दिए गए आदेश में कहा गया है कि पावर कारपोरेशन द्वारा एफपीपीसीए की गणना पूरी तरह गलत है। मासिक गणना केवल उसी माह की वास्तविक बिजली खरीद की लागत तथा ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर ही होगी।
आयोग ने कारपोरेशन को भविष्य में इस तरह की गलती न करने की हिदायत देते हुए कहा कि कानून की परिधि में रहकर ही कार्य करें। आदेश पर परिषद अध्यक्ष वर्मा ने आयोग में प्रस्ताव दाखिल कर अधिभार शुल्क पर रोक लगाने के साथ ही उपभोक्ताओं द्वारा जमा किए गए शुल्क का जुलाई के बिल में समायोजित कराने की मांग की।
वर्मा ने कहा कि गलत गणना से ईंधन अधिभार का अतिरिक्त वित्तीय भार उपभोक्ताओं पर डालने वालों की राज्य सरकार जिम्मेदारी तय कर कार्यवाही करे। वह आयोग से मांग करेंगे कि पिछले 14 महीने की गणना की जांच हो। उपभोक्ताओं से की गई अतिरिक्त वसूली की भरपाई सुनिश्चित करने को ठोस व्यवस्था भी बने।
