पंजाब के बठिंडा जिले में पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े संदिग्ध जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील क्षेत्र में बिना अनुमति के एक सोलर पावर आधारित खुफिया कैमरा स्थापित किया था, जिसके माध्यम से सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।
पुलिस के अनुसार यह मामला नौ जून को थाना थर्मल बठिंडा में दर्ज किया गया था। आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के दौरान पता चला कि बठिंडा-मलोट रोड स्थित अंबुजा फैक्टरी के सामने सरकारी बिजली के खंभे पर मार्च महीने में एक अत्याधुनिक सोलर पावर कैमरा लगाया गया था। कैमरे में सक्रिय सिम कार्ड लगा हुआ था, जिससे दूर बैठकर भी लाइव निगरानी संभव थी।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस कैमरे का मुख्य उद्देश्य राजस्थान, फाजिल्का और फिरोजपुर सीमा क्षेत्रों की ओर जाने वाले सैन्य काफिलों, सुरक्षा बलों की तैनाती और अन्य संवेदनशील गतिविधियों की जानकारी जुटाना था। आरोप है कि कैमरे के माध्यम से रिकॉर्ड की गई फुटेज और सूचनाएं पाकिस्तान तथा कनाडा में मौजूद देश विरोधी तत्वों और उनके एजेंटों तक पहुंचाई जा रही थीं। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी बठिंडा डॉ. ज्योति यादव बैंस के निर्देश पर विशेष जांच टीमें गठित की गईं। पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त टीमों ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया तंत्र की सहायता से पूरे नेटवर्क की गतिविधियों का पता लगाया। जांच के दौरान 10 जून को अमृतसर जिले के अजनाला क्षेत्र के गांव सराए निवासी 40 वर्षीय अशोक सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही और पूछताछ के आधार पर 14 जून को गांव सराए के ही 22 वर्षीय अकासदीप सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में दो अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता भी सामने आई है। मामले में अब तक चार लोगों को नामजद किया जा चुका है, जिनमें से दो गिरफ्तार हैं जबकि दो फरार चल रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पंजाब समेत विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने बेहद सोच-समझकर ऐसा स्थान चुना था, जहां से राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले सैन्य और सुरक्षा बलों के वाहनों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। पुलिस को आशंका है कि यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
