शिमला। हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस को इन चुनाव में मुंह की खानी पड़ी है। इसका मुख्य कारण कांग्रेस को अपनों से मिली चुनौती और पर्दे के पीछे से ही प्रचार करना भी रहा। अधिकांश जिलों में भाजपा समर्थित जिला परिषद के अध्यक्ष बनना लगभग तय है। हालांकि ये चुनाव पार्टी चुनाव चिह्न पर नहीं हुए हैं, ऐसे में कोई उलटफेर हो जाए, इससे भी इन्कार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस इन चुनावों में शुरू से ही पीछे चल रही थी। इसका कारण पार्टी की अपनी रणनीति रही। पार्टी ने निर्णय लिया कि चुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा नहीं करेगी। कांग्रेस विचारधारा से जो भी संबद्ध रखता है, वह चुनाव लड़ सकता है।
भाजपा ने की थी प्रत्याशियों की घोषणा
विपक्षी दल भाजपा ने न केवल जिला परिषद प्रत्याशियों को समर्थन दिया, बल्कि उनके नामों की औपचारिक घोषणा भी की। ऐसा करने से प्रत्याशियों को न केवल मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली, बल्कि उनका पूरा संगठन जिसमें पन्ना प्रमुख से लेकर ब्लाक व जिला अध्यक्षों ने मेहनत की। विधायक सहित वरिष्ठ नेता भी प्रचार को धार देने के लिए उतरे।
कई पर्दे के पीछे ही जुटे रहे
दूसरी तरफ, कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई। हालांकि बाद में नामांकन के दौरान कई मंत्री व विधायक आए, ज्यादातर विधायक व मंत्री प्रचार में सामने आने के बजाय पर्दे के पीछे से ही प्रचार में जुटे रहे। इसका ज्यादा लाभ नहीं मिल सका।
कांग्रेस विचारधारा के कई नेता थे मैदान में
कांग्रेस की हार का कारण अपने ही रहे। पार्टी ने जब प्रत्याशी नहीं उतारे, तो कांग्रेस विचारधारा से जुड़े दो से तीन प्रत्याशी एक ही जिला परिषद वार्डों से चुनावी मैदान में थे। कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को अपनों से ही जख्म मिले। यदि प्रत्याशी की घोषणा हो जाती, तो पार्टी कांग्रेस की ही विचारधारा से संबंध रखने वाले दूसरे प्रत्याशी को नाम वापसी के लिए मना सकती थी। इसका फायदा चुनाव में मिलना था।
संगठन की कमजोरी भी बनी हार की बड़ी वजह
पिछले डेढ़ साल तक हिमाचल कांग्रेस कमेटी का गठन ही नहीं हुआ था। ब्लाक, जिला व प्रदेश कमेटी थी ही नहीं। चुनावों से ठीक पहले कमेटियां बनाने का काम शुरू हुआ। डेढ़ साल तक जमीनी स्तर पर संगठन का कोई कार्यक्रम ही नहीं हुआ, जिससे पार्टी के अंदर एक बिखराव देखने को मिला। कांग्रेस ने नगर निगम के लिए जो पर्यवेक्षक व प्रभारी नियुक्त किए, लेकिन जिला परिषद चुनाव के लिए इस तरह का कोई दायित्व नहीं सौंपा गया।
