शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सोलन जिले के चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट में बेनामी संपत्तियों और धारा-118 के उल्लंघन की सीबीआइ और ईडी से जांच की मांग पर दायर जनहित याचिका में राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने याचिका में दिए तथ्यों और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद प्रतिवादियों को 20 जुलाई तक जवाब दायर करने के आदेश दिए।
अधिवक्ता विनय शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका में मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक, निदेशक सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, उपायुक्त सोलन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिमला, नगर निगम आयुक्त सोलन, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, पुलिस अधीक्षक सोलन, चेस्टर हिल प्रोजेक्ट के प्रमोटर हंसराज ठाकुर, आदित्य सिंगला व अर्पित गर्ग, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय तथा भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया है।
याचिकाकर्ता ने चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में बेनामी संपतियों को लेकर आरोप लगाया है। आरोप है कि एक कृषक की वार्षिक आय वर्ष 2017 तक छह लाख रुपये थी, जबकि पांच साल में ही वह दोगुनी दिखा दी गई। इसके साथ ही कृषक ने 275 बीघा भूमि भी खरीद ली।
यह भूमि उसने पत्नी और दो बहनों के नाम पर खरीदी। कसौली क्षेत्र में तीन जगह पर ये जमीनें खरीदी गईं। एसडीएम ने जब मामले की जांच शुरू की तो आयकर रिटर्न के आंकड़ों ने इस पूरे लेनदेन पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आकलन किया कि 2014-15, 2015-16 और 2016-17 के दौरान कृषक की औसत वार्षिक आय लगभग छह लाख रुपये थी, जबकि 2019-20, 2020-21 और 2021-22 में यह औसतन 12 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक पहुंच गई।
आरोप है कि अगर उसकी आय 12 लाख रुपये भी है तो भी वह एक साथ 275 बीघा जमीन कैसे खरीद सकता है। वहीं उसने आठ करोड़ रुपये का लोन भी बैंक से लिया, उसका भी तय समय से पहले भुगतान कर दिया। इन आंकड़ों के आधार पर संदेह जताया गया है कि इतनी सीमित आय वाले व्यक्ति द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में जमीन खरीदना आर्थिक रूप से संभव नहीं लगता।
यहां भी चेस्टर हिल के नए फ्लैट बनाए जाने थे। आरोप है कि कृषकों के नाम से धारा-118 की अनुमति लेकर प्रोजेक्ट निर्माताओं ने निर्माण कार्य शुरू किया। याचिकाकर्ता ने मुख्य सचिव पर गंभीर अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाए और कहा कि राजस्व सचिव रहते उन्होंने प्रोजेक्ट निर्माताओं के पक्ष में गैरकानूनी निर्णय लिए। इसकी एवज में उन्होंने प्रोजेक्ट निर्माताओं से करोड़ों की भूमि नाममात्र दाम चुकाकर खरीदी। कोर्ट ने सीबीआइ और ईडी को भी नोटिस जारी किए हैं।
