शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की जेल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब गंभीर और खतरनाक अपराधों में बंद कैदियों को जेल से अदालत तक शारीरिक रूप से नहीं लाया जाएगा। ऐसे आरोपियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करवाई जाएगी।
इस संबंध में गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। गृह विभाग की तरफ से अधिसूचना के अनुसार जिन कैदियों से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने, पुलिस पर हमले, फरार होने या गैंगवार की आशंका है, उन्हें जेल से बाहर नहीं लाया जाएगा।
सरकार ने आदेश में कहा है कि हाल के वर्षों में हिमाचल प्रदेश में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें कैदियों को अदालत ले जाते समय उनके साथियों ने पुलिस पर हमला कर उन्हें छुड़ाने की कोशिश की। कुछ मामलों में प्रतिद्वंद्वी गिरोहों ने भी रास्ते में हमला किया।
इन घटनाओं में सार्वजनिक स्थानों और अदालत परिसरों में खुलेआम फायरिंग हुई, जिससे आम लोगों में भय का माहौल पैदा हुआ और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।
ऐसे मामलों में शामिल आरोपी ज्यादातर संगठित अपराध, आतंकवादी गतिविधियों, हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े होते हैं। इसी को देखते हुए राज्यपाल ने विशेष श्रेणी के कैदियों को जेल से बाहर न लाने का आदेश जारी किया है।
अधिसूचना के अनुसार अब इन आरोपियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से करवाई जाएगी। जेल अधीक्षक संबंधित अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी सुनिश्चित करेंगे।
किन आरोपियों को नहीं लाया जाएगा कोर्ट
- सरकार ने सात श्रेणियां तय कीं
- गैर कानूनी गतिविधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा की आरोपी
- संगठित अपराध और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल आरोपी
- सीरियल किलर और दो या अधिक हत्या, हत्या के प्रयास के मामलों में आरोपी
- एनडीपीएस एक्ट में कमर्शियल क्वांटिटी और बार-बार अपराध करने वाले आरोपी
- गैंगस्टर, सुपारी किलर, हिंसक लुटेरे, डकैती और उगाही के आरोपी
- राष्ट्र के खिलाफ अपराधों में शामिल आरोपी
- पॉक्सो एक्ट और महिलाओं-बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों के आरोपी
क्या होगा नया सिस्टम
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी
- अब चिन्हित कैदियों को अदालत में फिजिकल पेशी के बजाय जेल परिसर से ही ऑनलाइन जोड़ा जाएगा। अदालत, जेल और पुलिस विभाग के बीच सुरक्षित वीडियो लिंक के जरिए सुनवाई होगी। सरकार का दावा है कि इससे सुरक्षा जोखिम कम होंगे और पुलिस बल की भी बचत होगी।
