शिमला। हिमाचल प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए पंजाब की तर्ज पर अपार्टमेंट एक्ट को नए सिरे से लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य बेनामी पैसों के निवेश को रोकना और खरीदारों तथा निवेशकों के हितों की सुरक्षा करना है। वर्तमान व्यवस्था में सुधार करते हुए एक ऐसा ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे सभी लेन-देन पारदर्शी हो सकें।
हिमाचल प्रदेश में रेरा लागू होने के बाद पूर्व में अपार्टमेंट एक्ट को समाप्त कर दिया गया था। हाल ही में चेस्टर हिल परियोजना से जुड़े मामलों ने इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता को उजागर किया है।
इस नई व्यवस्था के तहत प्रमोटरों के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है, जिससे अन्य राज्यों के निवेशकों द्वारा लगाए जाने वाले धन का भी पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके।
क्या होगा अपार्टमेंट एक्ट में प्रविधान
- अपार्टमेंट एक्ट एक कानूनी प्रविधान है, जो बहुमंजिला भवनों और फ्लैट की खरीद-बिक्री को नियंत्रित करता है।
- इसमें मालिकाना हक, साझा सुविधाओं और प्रबंधन से जुड़े नियमों का निर्धारण किया जाता है।
- बाहरी निवेशक तभी धन लगा सकेंगे जब वे अपार्टमेंट एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत होंगे।
हिमाचल में क्यों जरूरी लगा
हिमाचल में अपार्टमेंट एक्ट की आवश्यकता इसलिए महसूस की जा रही है क्योंकि रेरा लागू होने के बाद इसे समाप्त कर दिया गया था। हाल के प्रोजेक्ट्स में बाहरी लोगों ने हिमाचलियों के नाम पर जमीन लेकर निवेश किए हैं, जिससे नियमन की कमी के कारण पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
पंजाब माडल से क्या सीखा
पंजाब के माडल से सीखते हुए हिमाचल में रेरा और अपार्टमेंट एक्ट दोनों को साथ-साथ लागू करने की योजना है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को अधिक अधिकार दिए जाएंगे, जिससे प्रोजेक्ट्स की सख्त निगरानी की जा सके।
चेस्टर हिल मामले ने पंजाब की तर्ज पर रेरा के साथ अपार्टमेंट एक्ट को भी लागू करने की आवश्यकता जताई है। अन्य राज्यों के निवेशकों को अपार्टमेंट में पंजीकरण करवाने और निदेशक नगर एवं ग्राम नियोजन को शक्तियां देने पर विचार किया जा रहा है। संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। हिमाचल प्रदेश में 2017 में रेरा लागू होने के बाद अपार्टमेंट एक्ट समाप्त कर दिया गया।
-राजेश धर्माणी, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री।
