शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने आ गए। कारण यह था कि नेता प्रतिपक्ष दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर आए हैं। इस मुलाकात को लेकर जयराम की अनुपस्थिति में विधानसभा में सत्ता पक्ष की ओर से किए गए कटाक्ष पर नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति दर्ज की। इसे लेकर दोनों नेताओं के बीच टकराव हुआ।
जयराम ठाकुर गत रोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने दिल्ली गए थे। आज जयराम के सत्र में पहुंचने पर सदन में खूब वार-पलटवार हुआ।
खुशफहमी में न रहें जयराम
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर खुशफहमी में हैं। उन्होंने कहा कि जयराम ठाकुर इसी खुशफहमी में रहते हैं कि यहां पर सरकार चली जाएगी, मगर न तो सरकार जाएगी और न कुछ और होगा।
मेरा पुराना रिकार्ड देख लेना
सुक्खू ने कहा कि मेरा पुराना रिकार्ड देख लेना। वह जिस भी पद पर रहे हैं, लंबे समय तक रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान का आशीर्वाद मेरे साथ है, तो वहीं प्रदेश की जनता का आशीर्वाद भी साथ है। अपने कर्मों का आशीर्वाद होता है, जिसके आगे फिर कुछ नहीं चलता।
सरकार तब नहीं गई, अब तो मतलब ही नहीं बनता
इस दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने हंसते हुए कहा कि यदि सरकार जानी होती, तो फिर उसी समय चल जाती, जब जयराम ठाकुर ने सदन में कहा था कि इस सरकार को तो भगवान भी नहीं बचा सकते। उन्होंने कहा कि तब ऐसी परिस्थितियां थी कि सरकार चली जाती, मगर तब भी नहीं गई, तो अब तो सरकार जाने का मतलब ही नहीं बनता।
विपक्ष के नेता करते हैं अनर्गल टिप्पणी
उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता अनर्गल टिप्पणियां करते हैं, जिसके बाद तनाव में आकर वह भूल जाते हैं कि उन्होंने क्या कहा, वह क्या बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल व डीजल पर सेस पर जो बिल लाया गया है, उसमें सरकार को केवल अधिकार मिला है, अब सरकार विचार करेगी और सेस लगाने की अधिकतम सीमा 5 रुपये है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मीडिया के साथ जयराम ठाकुर ने जो कुछ भी कहा वह विधवाओं व अनाथ बच्चों का अपमान है।
मैंने प्रधानमंत्री से हिमाचल के हितों पर बात की : जयराम ठाकुर
इससे पूर्व सदन में प्वाइंट आफ ऑर्डर के तहत अपनी बात रखते हुए विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने गए थे और अच्छे माहौल में उनसे बातचीत हुई है। प्रधानमंत्री के साथ उन्होंने हिमाचल के हितों के विषयों पर बात की है। यह भी चर्चा हुई है कि कैसे प्रदेश की मदद की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि यहां पर बार-बार यह कहा जाता है कि जयराम दिल्ली गए और वहां पर मदद रोकने के लिए गए हैं। कभी हमने यह नहीं कहा कि मुख्यमंत्री दिल्ली गए और अपने नेताओं से वहां पर मिले। इस पर कभी विपक्ष ने नहीं पूछा कि वह अपने नेताओं से क्यों मिलने जाते हैं।
राजनीतिक टिप्पणी नहीं जिम्मेदारी से बोलें सीएम
उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम राजनीतिक टिप्पणियां करते हैं, लेकिन उन्हें सदन में जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए। वह सदन के नेता हैं जिनकी जिम्मेदारी बनती है मगर वह विशुद्घ रूप से राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार सीएम के द्वारा यह कहना कि विपक्ष के नेता तथ्यों पर नहीं बोलते यह गंभीर मामला है।
तो क्या सरकार सेस नहीं लगा रही
उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल व डीजल पर विधेयक लाया और भाजपा के विरोध के बावजूद उसे पारित किया गया। ऐसे में क्या सरकार सेस नहीं लगा रही है। इस पर यदि वह कुछ बोल रहे हैं तो इसमें क्या गलत है। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेताओं को लेकर भी टिप्पणी की। मगर उसे कार्यवाही से हटा दिया गया, इससे पहले एक बार सदन का माहौल तनावपूर्ण भी हो गया।
