शिमला। तारादेवी शिमला के बीच प्रस्तावित 13.79 किलोमीटर लंबे रोपवे यानि रज्जू मार्ग अब पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप) आधार पर बनेगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद इसकी मंजूरी दे दी है।
पिछला टेंडर रद्द कर हिमाचल प्रदेश रोपवे ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन (आरटीडीसी) इसके लिए नए सिरे से टेंडर जारी करेगा। राज्य की खराब वित्तीय स्थिति के मद्देनजर सरकार ने परियोजना का निर्माण खुद करने के बजाए पीपीपी मोड पर करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना के बनने के बाद शिमला शहर में जाम की समस्या दूर हो जाएगी।
1734 से 2296 करोड़ पहुंची लागत
पिछले तीन वर्षों से कई अधिकारी इस परियोजना पर लगातार कार्य कर रहे हैं। एनडीबी के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। हिमाचल प्रदेश रोपवे ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन (आरटीडीसी) ने इसकी डीपीआर तैयार करवाई थी। परियोजना निर्माण पर पहले 1734.40 करोड़ रुपये खर्च होने थे। पहले एफसीए क्लीयरेंस के कारण मामला लटका रहा।
आरटीडीसी ने इसके लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया था। इसमें एक ही कंपनी ने आवेदन किया। तीन बार रि टेंडर करने के बाद भी कंपनियां नहीं आई। नियमों के तहत कम से कम तीन कंपनियां आने पर ही काम आबंटित किया जाता है। सरकार ने एक कंपनी को काम नहीं दिया। विभाग ने मार्च 2025 से काम शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया था।
एनडीबी पोषित है परियोजना, देरी से बढ़ी सरकार की हिस्सेदारी
न्यू डवेल्पमेंट बैंक (एनडीबी) पोषित परियोजना में राज्य सरकार की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है, जो पहले 346.80 करोड़ रुपये थी, अब बढ़कर 459.2 करोड़ रुपये हो गई है। सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए सरकार ने इसे पीपीपी मोड पर बनाने का निर्णय लिया है यानि ये लागत अब कंपनी की वहन करेगी।
बोलीविया में है सबसे लंबा रज्जू मार्ग
विश्व में सबसे लंबा रज्जू मार्ग बोलीविया में 32 किलोमीटर है। शिमला में 13.79 किलोमीटर लंबा रज्जू मार्ग बनेगा।
यहां बनेंगे स्टेशन
तारा देवी, चक्कर, टुटीकंडी पार्किंग, आइएसबीटी, 103 टनल, रेलवे स्टेशन, विक्ट्री टनल, ओल्ड बस स्टैंड, आइसीआर, लक्कड़ बाजार, आइजीएमसी, संजौली, नवबहार, सचिवालय व लिफ्ट के पास रोपवे के बोर्डिंग स्टेशन चिन्हित किए गए हैं
