
हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक खींचतान देखने को मिली। कांग्रेस ने बैंक स्कैम के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बनाई थी, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण के संयमित रवैये और सत्ता पक्ष की जवाबी रणनीति के चलते विपक्ष अपनी योजना के मुताबिक तत्काल चर्चा नहीं करा सका। कांग्रेस की कोशिश थी कि बैंक स्कैम के मुद्दे पर सामान्य कार्यवाही को रोककर तत्काल चर्चा कराई जाए। इसके लिए पार्टी की ओर से काम रोको प्रस्ताव के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई गई। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रघुबीर सिंह कादियान ने इस मुद्दे पर दो बार प्रयास किया। हालांकि दोनों मौकों पर संसदीय प्रक्रिया और सदन की परिस्थितियों के कारण मामला कांग्रेस की अपेक्षा के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सका। इससे कांग्रेस की वह रणनीति कमजोर पड़ गई, जिसके तहत वह बैंक स्कैम को सोमवार की विधानसभा कार्यवाही का मुख्य राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार को घेरना चाहती थी। पूरी कार्यवाही के दौरान विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण का रवैया अपेक्षाकृत संयमित नजर आया। उन्होंने विपक्ष के साथ सीधे टकराव की स्थिति बनाने के बजाय पहले संवाद और समझाने का रास्ता अपनाया। अध्यक्ष की ओर से सदन की मर्यादा बनाए रखने और संसदीय प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया। उन्होंने विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर देने के साथ-साथ सदन की सामान्य कार्यवाही बनाए रखने की कोशिश की।
जब सदन में व्यवधान बढ़ा और कार्यवाही प्रभावित होने लगी तो अध्यक्ष ने अपने पद से मिले अधिकारों का इस्तेमाल करने में भी संकोच नहीं किया। इस दौरान उनका रुख न तो जरूरत से ज्यादा आक्रामक दिखाई दिया और न ही विपक्ष के दबाव में आता नजर आया। सोमवार की कार्यवाही में सत्ता पक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। भाजपा के मंत्रियों और विधायकों ने कांग्रेस के आरोपों और सवालों का राजनीतिक तथा संसदीय तरीके से जवाब देने की कोशिश की। सरकार की ओर से मंत्री अनिल विज, विपुल गोयल, डॉ. अरविंद शर्मा, कृष्ण बेदी और महिपाल डांडा सक्रिय नजर आए। उन्होंने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सरकार का पक्ष सदन में रखने की कोशिश की। इससे कांग्रेस के लिए सदन में एकतरफा राजनीतिक दबाव बनाने की स्थिति नहीं बन सकी। विपक्ष जब बैंक स्कैम सहित अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करता रहा, तो सत्ता पक्ष की ओर से भी जवाबी हमला देखने को मिला। कांग्रेस विधायक रघुबीर सिंह कादियान के दो प्रयास इस बात को दर्शाते हैं कि पार्टी बैंक स्कैम को तत्काल चर्चा के केंद्र में लाना चाहती थी। विपक्ष की कोशिश थी कि सामान्य कार्यवाही को रोककर सरकार से सीधे जवाब लिया जाए। हालांकि, प्रस्ताव को उस स्तर तक आगे नहीं ले जाया जा सका, जहां कांग्रेस अपनी शर्तों के मुताबिक सामान्य कार्यवाही रोककर बैंक स्कैम पर तत्काल चर्चा करा सके। यहीं पर विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण रही। कल्याण ने संसदीय नियमों और अध्यक्षीय अधिकारों के बीच संतुलन बनाते हुए कार्यवाही को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
मानसून सत्र के पहले दिन भी सदन में हंगामा और राजनीतिक टकराव देखने को मिला था। ऐसे में दूसरे दिन भी विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना पहले से बनी हुई थी। कांग्रेस के आक्रामक तेवरों और सरकार की जवाबी रणनीति के बीच सदन का माहौल लगातार राजनीतिक रूप से गर्म रहा। हालांकि अध्यक्ष ने शुरुआत में संयम बरतते हुए स्थिति को संभालने का प्रयास किया। हरविंदर कल्याण की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने खुद को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने के बजाय अध्यक्ष की भूमिका को प्राथमिकता दी। उन्होंने दोनों पक्षों को संसदीय मर्यादा के भीतर अपनी बात रखने का अवसर देने की कोशिश की। विधानसभा अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव के बावजूद सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलती रहे। सोमवार को कल्याण ने इसी संतुलन को बनाए रखने का प्रयास किया। कांग्रेस की ओर से बैंक स्कैम को लेकर काम रोको प्रस्ताव के जरिए तत्काल राजनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश सफल नहीं हो पाई। वहीं, भाजपा ने भी विपक्ष के हमलों का राजनीतिक जवाब देकर सदन में अपनी स्थिति मजबूती से रखने का प्रयास किया।
हालांकि, बैंक स्कैम का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में कांग्रेस इस मामले को दोबारा सदन में जोर-शोर से उठा सकती है और सरकार से जवाब मांग सकती है। दूसरी ओर, सरकार भी विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए तैयार दिखाई दे रही है। ऐसे में मानसून सत्र के बाकी दिनों में बैंक स्कैम समेत कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने की संभावना बनी हुई है। सोमवार की कार्यवाही ने यह जरूर संकेत दिया कि विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण टकराव बढ़ाने के बजाय पहले संवाद और संसदीय प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की रणनीति पर चल रहे हैं। हालांकि, सदन की कार्यवाही प्रभावित होने की स्थिति में वह अध्यक्षीय अधिकारों का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस बैंक स्कैम के मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाती है और सरकार इसका क्या जवाब देती है। साथ ही, विधानसभा अध्यक्ष के लिए भी चुनौती रहेगी कि राजनीतिक गर्मी के बीच सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित और सुचारू बनाए रखा जाए।
