शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को शनिवार को सम्मानित किया गया। शिक्षक दिवस पर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने शिक्षकों को पुरस्कार दिए। इनमें 21 स्कूल, पांच कालेज और पांच तकनीकी शिक्षा विभाग के शिक्षक हैं। पिछले साल राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षक को भी पुरस्कार दिया गया।
राष्ट्रगीत से समारोह की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत में पहले राष्ट्रगीत गाया गया और उसके बाद राष्ट्रगान हुआ। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
सीएम नहीं पहुंचे कार्यक्रम में
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सुक्खू शामिल नहीं हुए। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन आवश्यक कार्यों के चलते नहीं पहुंच पाए। उन्होंने सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दी हैं।
डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि
पूर्व राष्ट्रपति, शिक्षाविद और दार्शनिक डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने और विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए तैयार करने तक सीमित नहीं है। शिक्षक बच्चों के चरित्र, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और मूल्यों का निर्माण करते हैं। राष्ट्र का भविष्य कक्षाओं में तैयार होता है और शिक्षक उस भविष्य को दिशा देते हैं।
मशीन ज्ञान दे सकती है, संस्कार और सपनों की उड़ान गुरु ही देगा : राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था केवल शिक्षक से नहीं बनती, इसमें शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी तीनों की समान भागीदारी जरूरी है। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार कोई पदक या प्रशस्ति पत्र नहीं, बल्कि यह है कि उसके विद्यार्थी उसे जीवनभर याद रखें। जब यही विद्यार्थी आगे बढ़कर परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए सार्थक योगदान देता है तो शिक्षक की मेहनत सही मायने में सफल होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के बाद शिक्षा का दायरा केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं रहा है।
तकनीक जानकारी उपलब्ध करा सकती है और पढ़ाई को आसान बना सकती है, लेकिन बच्चे की जिज्ञासा को समझना, उसकी हताशा में उसका हाथ थामना और उसे सही राह दिखाना मशीन के बस की बात नहीं। मशीन जानकारी दे सकती है, लेकिन सीखने की लौ और जीवन में आगे बढ़ने का हौसला गुरु ही जगा सकता है।
सामान्य श्रेणी में इन्हें मिला पुरस्कार
तिलक राज (कांगड़ा), अजय कुमार (किन्नौर), किरण कुमार (किन्नौर), राकेश कुमार (किन्नौर),संजय कुमार नेगी (किन्नौर), मनोज कुमार (किन्नौर), इंदर प्रकाश (किन्नौर), जगदीश कुमार (बिलासपुर), रोहन लाल (मंडी), राकेश सिंह (हमीरपुर),पूर्णिमा कुमारी (हमीरपुर), खेचोक जांगपो (लाहौल-स्पीति), चमन लाल (शिमला), लोकेंद्र सिंह (शिमला) और सृष्टि शर्मा (सिरमौर) को पुरस्कार दिया गया। पिछले साल राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शशिपाल को इस बार राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
विशेष पुरस्कार श्रेणी
रोशनी देवी (सोलन), सारिका आहूजा (शिमला), बलवंत जोहटा (शिमला), स्नेह लता (बिलासपुर), ललित कुमार (मंडी) और वीरेंद्र चौहान (शिमला) को पुरस्कार दिया गया।
तकनीकी शिक्षा में इन्हें मिला
डा. विवेक कुमार, डा. रितेश कौंडल, पोहलो राम, सुभाष चंद, रवि दत्त को पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उच्च शिक्षा विभाग से 5 शिक्षाविद चुने गए
डा. पंकज बसोतिया, डा. हरबंस लाल शर्मा, डा. समजीत सिंह ठाकुर डा. प्रशांत रमन रवि, रवि कांत को सम्मानित किया गया।
