हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और NEET आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर विद्यार्थियों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में विधानसभा तक मार्च किया। कांग्रेस विधायक काले कपड़े पहनकर विधानसभा की ओर बढ़े और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विधायकों ने ‘चढ़ावा चोर कहां मिलेंगे, बीजेपी के दफ्तर में’ जैसे नारे लगाए।
कांग्रेस के मार्च को रोकने के लिए पुलिस की ओर से कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें कुछ विधायकों को चोटें आईं। प्रदर्शन के दौरान विधानसभा परिसर के बाहर काफी देर तक गहमागहमी का माहौल रहा।
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदर्शन के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। उनके मुताबिक, जंतर-मंतर हो या विधानसभा तक मार्च, शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने वालों के खिलाफ बल प्रयोग करना संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
हुड्डा ने आरोप लगाया कि जिस तरह पुलिस ने उन्हें और कांग्रेस विधायकों को धक्का दिया, उससे ऐसा लगा जैसे सरकार ने पुलिस की वर्दी में गुंडे भेज रखे हों। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना है और कांग्रेस इन मुद्दों को विधानसभा के अंदर और सड़क पर लगातार उठाती रहेगी।
हुड्डा ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चढ़ावे से जुड़े आरोपों ने भगवान राम में आस्था रखने वाले लोगों की भावनाओं को प्रभावित किया है। कांग्रेस की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने जांच की टाइमलाइन पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोप जून 2026 की शुरुआत में सार्वजनिक हुए थे। इसके बाद 13 जून को SIT का गठन किया गया, 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट आई और 25 जून को FIR दर्ज हुई। हुड्डा ने पूछा कि आरोप सामने आने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई और क्या इस देरी से साक्ष्यों के प्रभावित होने की कोई संभावना बनी।
नेता प्रतिपक्ष ने जांच में सामने आई कथित सुरक्षा खामियों का भी मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, गिनती प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा गार्ड, फ्रिस्किंग, पॉकेट रहित कपड़े और 180 दिन की CCTV फुटेज जैसी निर्धारित SOP का पालन नहीं हुआ। उन्होंने सवाल किया कि यदि CCTV फुटेज केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रही तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ट्रस्ट प्रबंधन की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई।
हुड्डा ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जांच में बड़े स्तर के लोगों को क्लीन चिट दी गई है तो इसका आधार क्या है। उन्होंने पूछा कि क्या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त है और क्या करोड़ों रुपये के चढ़ावे की कथित चोरी कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद केवल निचले स्तर के कर्मचारियों द्वारा की जा सकती है।
NEET आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पैलेट गन से घायल हुए एक बच्चे की FIR दर्ज करने से इनकार किया गया था। हुड्डा के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विरोध और थाने में धरने के बाद FIR दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को अब सड़क से लेकर विधानसभा तक उठाएगी और सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग करेगी।
हुड्डा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को युवाओं और छात्रों के संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यदि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पहले ही इस्तीफा दे दिया जाता तो छात्रों को कथित लाठीचार्ज और लंबे आंदोलन का सामना नहीं करना पड़ता। कांग्रेस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।
पेपर लीक के मुद्दे पर हुड्डा ने कहा कि यह समस्या अब केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। उनके अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं के कारण युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा में भी कई भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पेपर लीक के आरोप सामने आते रहे हैं।
हुड्डा ने HCS, CET, SI भर्ती, डेंटल सर्जन, पुलिस कांस्टेबल, ग्राम सचिव, क्लर्क, PTI, HTET और अन्य परीक्षाओं का जिक्र करते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देशभर में बड़ी संख्या में पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं और इससे करोड़ों अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। कांग्रेस का दावा है कि NEET विवाद समेत विभिन्न पेपर लीक मामलों ने छात्रों और अभ्यर्थियों के मानसिक दबाव को बढ़ाया है।
विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन हुए इस प्रदर्शन से साफ है कि कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए चढ़ावा चोरी, NEET विवाद, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। अब विधानसभा के भीतर इन मुद्दों पर होने वाली चर्चा के दौरान सरकार की ओर से क्या जवाब दिया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
