पंजाब में नशे की तस्करी की चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है। भारत-पाकिस्तान सीमा से हेरोइन और दूसरे मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के बावजूद तस्कर लगातार नए तरीके अपना रहे हैं । सीमा पार से नशे की खेप पहुंचाने के लिए अब ड्रोन का इस्तेमाल भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में पंजाब से करीब 1150 किलो हेरोइन बरामद की गई। देश में हेरोइन तस्करी के मामलों के लिहाज से पंजाब सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल रहा। पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में तस्करी का दबाव सबसे ज्यादा नजर आता है। अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और गुरदासपुर में लगातार नशीले पदार्थों की खेप पकड़े जाने के मामले सामने आते रहे हैं।
इनमें अमृतसर को नशा तस्करी के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। हेरोइन के अलावा दूसरे मादक पदार्थों की बरामदगी भी लगातार होती रही है। NCB के अनुसार, 2024 में पंजाब से 863 किलो गांजा, 997 किलो अफीम और 41,418 किलो डोडा बरामद किया गया। इसके अलावा 6,952 इंजेक्शन और 28.05 लाख नशीली गोलियां भी जब्त की गईं। आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में नशे की तस्करी सिर्फ हेरोइन तक सीमित नहीं है। अलग-अलग तरह के मादक पदार्थों की सप्लाई के लिए कई स्तरों पर नेटवर्क सक्रिय होने की तस्वीर सामने आती है। ड्रोन से बढ़ी सीमा पार तस्करी की चुनौती सीमा पार से नशे की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन गया है। NCB के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में पंजाब में ड्रोन के जरिये तस्करी के 163 मामले सामने आए। इन मामलों में 187 किलो हेरोइन, 5.39 किलो मेथामफेटामाइन और 4.22 किलो अफीम बरामद की गई। इससे पता चलता है कि तस्कर अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से खेप पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। छोटे आकार के ड्रोन के जरिए सीमा पार से खेप गिराने के बाद उसे स्थानीय तस्करों तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है। इसके चलते सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे ड्रोन की पहचान और उन्हें रोकना महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
विदेश में बैठे हैंडलरों तक पहुंची जांच
पंजाब में पकड़े गए कई तस्करी मामलों की जांच में विदेश में बैठे हैंडलरों के साथ आरोपियों के संपर्क की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, सीमा पार से खेप पहुंचने के बाद स्थानीय नेटवर्क के जरिए इसे पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है। हाल के कई ऑपरेशनों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे नेटवर्क से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इन मामलों में विदेशी हैंडलरों और स्थानीय तस्करों के बीच संपर्क की जांच की जा रही है। 25 अगस्त को काउंटर इंटेलिजेंस फिरोजपुर और BSF ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फिरोजपुर के गांव गजनीवाला के सीमावर्ती क्षेत्र से 44.5 किलो हेरोइन और 3 किलो मेथामफेटामाइन बरामद की थी। जांच में यह बात सामने आने का दावा किया गया कि बरामद खेप सीमा पार से ड्रोन के जरिए भेजी गई थी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी पर सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान केंद्रित किया।
इससे पहले 7 अगस्त को अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने नशे और अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े एक मॉड्यूल का पर्दाफाश करने का दावा किया था। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 21.299 किलो हेरोइन और 970 ग्राम ICE यानी मेथामफेटामाइन बरामद की थी। कार्रवाई के दौरान एक .30 बोर की अवैध पिस्तौल और चार कारतूस भी बरामद किए गए थे। पुलिस के मुताबिक, मामले में मुख्य आरोपी के विदेश में बैठे तस्कर के संपर्क में होने की बात जांच में सामने आई थी।
हेल्पलाइन पर भी बड़ी संख्या में शिकायतें
नशे की तस्करी और अवैध खेती की जानकारी देने के साथ पुनर्वास संबंधी सहायता के लिए NCB की ओर से मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 जारी किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक साल में पंजाब से इस हेल्पलाइन पर 517 कॉल आईं। इनमें 193 कॉल नशा तस्करी से संबंधित शिकायतों की थीं। वहीं, 89 लोगों ने पुनर्वास सहायता के लिए संपर्क किया। नशीले पदार्थों की अवैध खेती से संबंधित एक शिकायत भी दर्ज हुई, जबकि 234 लोगों ने हेल्पलाइन की अन्य सेवाओं के बारे में जानकारी ली।
सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम से निगरानी
सीमा पार से ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी पर रोक लगाने के लिए पंजाब में एंटी-ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार ने सीमा क्षेत्र में नौ अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किए हैं। इन सिस्टम की खरीद पर करीब 51.41 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इनकी मदद से ड्रोन की गतिविधियों के साथ उसके नियंत्रण केंद्र की स्थिति का पता लगाने की क्षमता होने का दावा किया गया है। सिस्टम में रियल टाइम मैप पर खतरे की जानकारी और स्वत: चेतावनी देने जैसी सुविधाएं भी बताई गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां इन तकनीकों के जरिए सीमा क्षेत्र में ड्रोन गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।
अगस्त में 20 किलो हेरोइन की बरामदगी
काउंटर इंटेलिजेंस अमृतसर ने 1 अगस्त को सीमा पार नशा तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क के एक कथित गुर्गे को 20 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी विदेशी हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था। उस पर सीमावर्ती क्षेत्र से हेरोइन की खेप हासिल कर उसे पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाने की जिम्मेदारी होने का आरोप था।
30 किलो हेरोइन के साथ दो गिरफ्तार
14 जुलाई को काउंटर इंटेलिजेंस अमृतसर ने सीमा पार से चल रहे कथित नशा तस्करी मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 30 किलो हेरोइन बरामद की गई। जांच में दोनों आरोपियों के विदेशी हैंडलरों से संपर्क होने की बात सामने आने का दावा किया गया। आरोपियों पर अलग-अलग स्थानों से हेरोइन हासिल कर पंजाब में आगे सप्लाई करने का आरोप था। महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार 23 जुलाई को अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया था। आरोपियों के कब्जे से 6.5 किलो हेरोइन और 9.90 लाख रुपये की नशीली रकम बरामद की गई। पुलिस ने इस कार्रवाई को नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया था। मामले की जांच के दौरान नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली गई। दो पिस्तौल के साथ चार आरोपी पकड़े
18 जुलाई को अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 5.557 किलो हेरोइन और दो आधुनिक पिस्तौल बरामद करने का दावा किया था। जांच के मुताबिक, आरोपियों के विदेशी तस्करों के संपर्क में होने की बात सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, नशे और हथियारों की खेप को आगे आपराधिक नेटवर्क तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाना था।
30.672 किलो हेरोइन बरामद
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की फिरोजपुर रेंज ने सीमा पार से चल रहे कथित नशा तस्करी मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के कब्जे से 30.672 किलो हेरोइन बरामद की गई। जांच के अनुसार, खेप सीमा पार से भेजी गई थी और इसे आगे सप्लाई करने के लिए फिरोजपुर क्षेत्र में हासिल किया गया था। इन लगातार कार्रवाइयों से यह सामने आता है कि पंजाब में नशा तस्करी का नेटवर्क कई स्तरों पर संचालित होने का आरोप है। सीमा पार के तस्करों, विदेशी हैंडलरों और स्थानीय नेटवर्क के बीच कथित कड़ियों की जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। चुनौती सिर्फ सीमा पर नशे की खेप रोकने तक सीमित नहीं है। एजेंसियों के सामने उन नेटवर्क को तोड़ना भी बड़ी चुनौती है, जो कथित तौर पर सीमा से खेप हासिल करने के बाद उसे राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाते हैं। पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई के साथ आम लोगों से भी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाने की अपील की जा रही है। एजेंसियों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली विश्वसनीय सूचनाएं तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
