देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू कर देश के अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। बीते एक वर्ष में यूसीसी के प्रावधानों को जिस पारदर्शिता और सरलता से लागू किया गया है, उससे आमजन का विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के अंतर्गत पंजीकरण करा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता हर दृष्टि से एक मॉडल कानून बनकर उभरी है।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू हुए आगामी 27 जनवरी को एक वर्ष पूर्ण होने जा रहा है। महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समानता सुनिश्चित करने के साथ-साथ यूसीसी का एक बड़ा योगदान प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण के रूप में सामने आया है।
यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और सुगम हो गई है। यही कारण है कि एक वर्ष से भी कम समय में 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण किया जा चुका है। अब पति-पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, जबकि पहले उन्हें दो गवाहों के साथ तय तिथि पर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य था।
यूसीसी से पहले विवाह पंजीकरण ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत होता था, जिसमें पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी। लेकिन यूसीसी लागू होने के बाद लगभग शत-प्रतिशत विवाह पंजीकरण ऑनलाइन हो रहे हैं। दंपत्ति और गवाह अपने दस्तावेजों के साथ वीडियो बयान भी ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।
सोमवार, 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक कुल 4,74,447 विवाह पंजीकरण पूरे हो चुके हैं। इस प्रकार प्रतिदिन औसतन लगभग 1400 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं, जबकि पुराने अधिनियम के तहत यह संख्या औसतन 67 प्रतिदिन थी।
इस अवधि में 316 लोगों ने विवाह विच्छेद, 68 ने लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण तथा 02 ने लिव-इन रिलेशनशिप समाप्ति प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त किया है।
यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 15 दिन की समय-सीमा निर्धारित है, लेकिन व्यवहार में औसतन पांच दिन के भीतर ही प्रमाणपत्र उपलब्ध हो रहा है। जबकि पुराने कानून में न तो समय-सीमा तय थी और न ही ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध थी।
