शिमला। हिमाचल प्रदेश में दल-बदल की राजनीति पर लगाम कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुआई में विधानसभा ने बजट सत्र के अंतिम दिन ‘हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदस्यों के भत्ते और पेंशन संशोधन विधेयक, 2026’ को विपक्षी भाजपा के भारी विरोध के बावजूद पारित कर दिया।
नए कानून के तहत अब अकोई विधायक संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत अयोग्य घोषित होता है तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह संशोधन 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव से जुड़ा है, जिसमें विधायकों के भत्ते और पेंशन का प्रविधान है। कांग्रेस के छह विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ जाकर मतदान किया।
उपचुनाव में विरोध करने वाले कांग्रेस के छह विधायकों में से दो ही उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। चैतन्य शर्मा व देवेंद्र भुट्टो को पेंशन से होना पड़ेगा वंचित: विधेयक लागू होने के बाद कांग्रेस के पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा (गगरेट) और देवेंद्र कुमार भुट्टो (कुटलैहड़) को पेंशन से वंचित होना पड़ेगा। दोनों को फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रास वोटिंग और पार्टी व्हिप उल्लंघन के चलते अयोग्यता का सामना करना पड़ा था।
निर्दलीय विधायक होशियार सिंह, केएल ठाकुर को पेंशन मामले में किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ेगा, जबकि रवि ठाकुर, राजेंद्र राणा को 14वीं विधानसभा के कार्यकाल को छोड़कर पिछले कार्यकाल की पेंशन मिलेगी। सुधीर शर्मा, आशीष शर्मा व इंद्रदत्त लखनपाल उपचुनाव जीतकर दोबारा विधानसभा आए हैं, उन्हें पेंशन के मामले में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
