पंचकूला। हरियाणा में गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, झज्जर, सोनीपत और हिसार सहित विभिन्न जिलों में जमीन, मकान और दुकान खरीदना अब और महंगा होगा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की हरी झंडी मिलते ही सभी जिलाें में उपायुक्तों ने कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी कर दी है। बढ़े कलेक्टर रेट बुधवार से लागू होंगे।
प्रदेश में कलेक्टर रेट के हिसाब से कुल एक लाख 60 हजार सेगमेंट हैं। इनमें से 68 प्रतिशत में बदलाव नहीं हुआ है। सात प्रतिशत सेगमेंट में अधिकतम 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिनमें अधिकतर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के जिले शामिल हैं। 35 प्रतिशत सेगमेंट में दस प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, जबकि अन्य स्थानों पर 15, 30 और 50 प्रतिशत तक की बढ़ाेतरी की गई है।
क्या होते हैं कलेक्टर रेट?
कलेक्टर रेट किसी भी जिले में सरकार द्वारा निर्धारित जमीन की वह न्यूनतम कीमत है, जिस पर कोई रियल एस्टेट प्रॉपर्टी खरीदार को बेची जा सकती है। इसी पर तहसीलों में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होती है। चूंकि जमीन की वास्तविक कीमत अमूमन कलेक्टर रेट से अधिक होती है, इसलिए हर साल इसमें बदलाव किया जाता है, जो स्थान और बाजार के रुझान पर निर्भर करता है। हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग कलेक्टर रेट तय होते हैं।
कलेक्टर रेट बढ़ने से किसानों को सीधा फायदा होगा, जिनकी जमीन विकास परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल की जानी है। भूमि अधिग्रहण की स्थिति में उन्हें सरकार की ओर से अधिक मुआवजा मिल सकेगा। इसी तरह शहरों में मकान-दुकान खरीदने के इच्छुक लोग बैंकों से अधिक ऋण ले सकेंगे।
रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ेगी
सरकार को भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर अधिक स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस मिलेगी, जिसका इस्तेमाल जनहित में किया जा सकेगा। कलेक्टर रेट को मौजूदा बाजार दर के साथ संरेखित करने से प्रॉपर्टी का सही मूल्यांकन होगा और लेन-देन में नकदी को इधर-उधर करने पर भी अंकुश लग सकेगा।
