शिमला। हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था सीमित संसाधनों के बावजूद चालू वित्त वर्ष में मजबूती के साथ आगे बढ़ती नजर आ रही है। विकास दर हो या प्रति व्यक्ति आय, दोनों मोर्चों पर प्रदेश ने राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ा है। यह तस्वीर बनी है विधानसभा में शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से पेश सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में प्रदेश की विकास दर 8.3 प्रतिशत अनुमानित है, जो राष्ट्रीय स्तर पर अनुमानित 7.6 प्रतिशत से अधिक है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 2,83,626 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो गत वर्ष की तुलना में 9.8 प्रतिशत अधिक है।
यह राष्ट्रीय औसत से करीब 64,000 रुपये ज्यादा है। पिछले वर्ष प्रति व्यक्ति आय 2,58,196 रुपये थी। पर्यटन विस्तार को भी आर्थिकी की रीढ़ बताया गया है। बिजली बिक्री से करीब 1900 करोड़ रुपये राजस्व मिलने की संभावना जताई है। सेवा के साथ पर्यटन, व्यापार, परिवहन और ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा योजनाओं ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र को पछाड़कर शीर्ष पर सेवा क्षेत्र
किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को तीन प्रमुख क्षेत्रों प्राथमिक, द्वितीय और तृतीय क्षेत्र के योगदान को आर्थिक योगदान को मापा जाता है। वर्तमान वित्त वर्ष में सकल राज्य मूल्य वर्धित अनुमान में तृतीय क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) सबसे ऊपर रहेगा। इस क्षेत्र का प्रचलित मूल्यों पर सकल राज्य मूल्य वर्धित में 46.3 प्रतिशत का हिस्सा है। द्वितीय क्षेत्र (उद्योग एवं विनिर्माण) का 39.4 प्रतिशत और प्राथमिक क्षेत्र (कृषि एवं संबद्ध) का 14.3 प्रतिशत है।
उद्योग, ऊर्जा व पर्यटन से भी उम्मीदें
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2025-26 में उद्योग क्षेत्र का अनुमानित आकार 94,381 करोड़ रुपये तक होने की संभावना है। सरकार ने उद्योगपतियों के लिए स्वीकृतियों को जिस तरह से सरल किया है, उससे निवेश में तेजी आई है। निर्माण क्षेत्र 8.42 प्रतिशत और बिजली क्षेत्र 6.22 प्रतिशत रहेगा। सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में समयानुसार सौर, पवन ऊर्जा में कदम बढ़ाया है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन क्षेत्र का योगदान 7.77 प्रतिशत रहने का अनुमान है। बढ़ते पर्यटक आगमन और बेहतर कनेक्टिविटी ने इसे मजबूती दी है।
चुनौतियां भी कम नहीं
आर्थिक सर्वेक्षण में विकास की सकारात्मक तस्वीर सामने आई है, लेकिन कुछ गंभीर चुनौतियां भी रेखांकित की हैं। सरकार के लिए ऋण का तेजी से बढ़ता बोझ चिंता का विषय है। राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद आय के नए स्रोत पैदा करना चुनौतीपूर्ण रहेगा। सबसे बड़ी समस्या बढ़ती बेरोजगारी है। प्रदेश की युवा पीढ़ी आज भी सरकारी नौकरी को ही रोजगार मानती है।
प्रदेश सरकार को विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ वित्तीय अनुशासन और रोजगार सृजन पर खास ध्यान देना होगा। कुल मिलाकर आर्थिक सर्वेक्षण ने यह संकेत दिया है कि प्रदेश को सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। चुनौतियों से निपटने के लिए अभी से ठोस रणनीति बनाना जरूरी होगा। – प्रदीप चौहान, पूर्व आर्थिक सलाहकार।
ऐसी बढ़ी प्रति व्यक्ति आय
| वर्ष | प्रति व्यक्ति आय (रुपये में) |
| 2025-26 | 2,83,626 |
| 2024-25 | 2,58,196 |
| 2023-24 | 2,34,436 |
| 2022-23 | 2,14,129 |
| 2021-22 | 1,93,392 |
| 2020-21 | 1,73,565 |
