शिमला। प्रदेश में अपराधों पर पूरा नियंत्रण है। पूर्व की भाजपा सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल के आपराधिक मामलों की अपेक्षा वर्तमान सरकार के तीन साल के कार्यकाल में 1440 मामलों कम आए और 6 प्रतिशत की कमी हुई है।
भ्रष्टाचार में विधानसभा का सदस्य या कोई और भी संलिप्त होगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ये बात मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने विपक्ष द्वारा बजट को लेकर कानून व्यवस्था पर लाए गए कटौती प्रस्ताव के दौरान विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में कही। उन्हाेंने कहा कि रिज पर मुख्यमंत्री बनने की शपथ के दौरान यही शपथ ली थी और इसके आधार पर काम कर रहे हैं।
पूर्व की जयराम सरकार के पहले तीन वर्ष के कार्यकाल के दौरान आपराधिक मामले 60148 दर्ज हुए जबकि वर्तमान सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल के दौरान 56706 मामले दर्ज हुए। इससे पूर्व भाजपा के हमीरपुर ये विधायक आशीष शर्मा द्वारा उन्हें राजनीतिक द्वेष से प्रताडित करने की बात उठाने पर सदन में टकराव हुआ और नारेबाजी की। विधनसभा अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए सदन में रखने से इनकार कर दिया।
पुलिस बेहतर काम कर रही है: सीएम सुक्खू
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बेहतर काम कर रही है, भ्रष्टाचार और खनन माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं और शाम 7 बजे के बाद खनन पर रोक लगाई और कार्रवाई की। पुलिस अपना काम कर रही है और यदि गलत हुआ तो न्यायालय में भी इस संबंध में उठा सकते हैं। आशीष शर्मा को कहा कि उनकी जमानत वहां भी तो रद्द हुई।
इससे पूर्व हमीरपुर से भाजपा विधायक आशीष शर्मा ने राजनीतिक द्वेष से पुलिस द्वारा कार्रवाई और उन्हें ही प्रताडित करने की बात को रखना चाहा तो मुख्यमंत्री ने कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है इसलिए विधानसभा में चर्चा नहीं हो सकती।
विधानसभा अध्यक्ष ने भी मामला न्यायालय में लंबित होने का हवाला दिया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष और रणधीर शर्मा ने कहा कि वैसे तो सारे मामले ही लंबित होंगे तो क्या उस पर चर्चा ही नहीं होगी।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि नियम 310 के तहत यदि कोई सदस्य न्यायालय में मामले के लंबित होने से संबंधित आपत्ति जताता है तो उस पर चर्चा नहीं हो सकती है। इसलिए अनुमति नहीं दी जा सकती। मुख्यमंत्री जब जवाब दे रहे थे तो विपक्ष ने कहा कि असत्य बोल रहे हैं। इस दौरान सदन में टकराव हुआ और विपक्ष मुख्यमंत्री के जवाब देने के दौरान नारेबाजी करते रहे। नारेबाजी के बीच संख्या बल के तहत कटाैती प्रस्ताव गिर गया।
त्रिलोक जमवाल बोले एसपी को अपनी शिकायत में दस घंटे लग गए आम आदमी का क्या
त्रिलोक जमवाल ने कहा कि बिलासपुर के एसपी के साथ मारपीट की गई और उस एसपी को अपने साथ हुई मारपीट की एफआइआर करवाने में दस घंटे लग गए। ऐसे में आम आदमी के साथ क्या होगा। इस दौरान बिलासपुर गोलीकांड शीत कानून व्यवस्था को उठाया। डीजीपी को छुट्टी पर भेज दिया ताकि डीजीपी पद से सेवानिवृत्त हो सके ये कौन सी व्यवस्था है योग्य व्यक्ति को लगाओ।
