Haryana में रिहायशी प्लॉटों पर स्टिल्ट प्लस फोर (S+4) मंजिल बनाने की नीति पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। Punjab and Haryana High Court द्वारा इस नीति के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने के बाद राज्य सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने सभी नई मंजूरियों और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
चीफ जस्टिस Sheel Nagu और जस्टिस Sanjeev Berry की खंडपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने केवल राजस्व बढ़ाने के लिए आम जनता की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की क्षमता को नजरअंदाज किया है।
कोर्ट ने खास तौर पर Gurugram का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सड़कें, सीवरेज और पानी की व्यवस्था पहले ही दबाव में है। बिना किसी इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑडिट के अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति देना शहर को गंभीर संकट की ओर ले जा सकता है।
हाईकोर्ट के 2 अप्रैल 2026 के आदेश के बाद निदेशक (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) ने Haryana Shehri Vikas Pradhikaran, Urban Local Bodies Haryana और Haryana State Industrial and Infrastructure Development Corporation को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि S+4 के लिए किसी भी नए बिल्डिंग प्लान को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
साथ ही जिन प्रोजेक्ट्स पर निर्माण कार्य चल रहा है, उनकी आगे की प्रक्रिया भी फिलहाल रोक दी गई है। 8 अप्रैल 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक कोई नया OC जारी नहीं किया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं में शामिल पूर्व सेना प्रमुख Ved Prakash Malik समेत अन्य लोगों का आरोप है कि सरकार ने पी. राघवेंद्र राव कमेटी की उन सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि जिन पुराने सेक्टरों में सड़कों की चौड़ाई 10–12 मीटर से कम है, वहां S+4 की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने यह भी पाया कि कई इलाकों में सड़कों की चौड़ाई कागजों में तो ज्यादा दिखाई गई है, लेकिन अतिक्रमण और खराब प्लानिंग के कारण वास्तविक चौड़ाई काफी कम है।
फिलहाल इस फैसले के बाद बिल्डरों और प्लॉट मालिकों में चिंता बढ़ गई है, जबकि कई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने अदालत के इस कदम का स्वागत किया है। अब सबकी नजरें 8 अप्रैल 2026 की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
