उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने अपराध समीक्षा बैठक में जनशिकायतों के निस्तारण में पीछे रहे जिलों के पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। डीजीपी ने कहा कि मुकदमा दर्ज होने से पूर्व की पुलिसिंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण को थानों-चौकियों पर तैनाती के आधार के रूप में भी शामिल किया जाए।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी एडीजी जोन, पुलिस आयुक्तों, आईजी-डीआईजी रेंज, एसएसपी-एसपी के साथ अपराध समीक्षा बैठक की। मुख्य रूप से आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण, विवेचनाओं के गुणवत्तापूर्ण व समयबद्ध निष्पादन, जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान, यक्ष ऐप के प्रभावी उपयोग तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े अन्य बिंदुओं की समीक्षा की।
डीजीपी ने तीन जिलों के पुलिस अधिकारियों की प्रशंसा की
डीजीपी राजीव कृष्ण ने उन्होंने सभी जिलों को जनशिकायतों में 40 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य दिया था। समीक्षा में पाया गया कि संभल, फीरोजाबाद व इटावा में जनशिकायतों में लगभग 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। डीजीपी ने तीनों जिलों के पुलिस अधिकारियों की प्रशंसा की और जनशिकायतों के निस्तारण में किए गए खास प्रयासों को पूरे प्रदेश में लागू कराए जाने का निर्देश दिया। समीक्षा में यह भी सामने आया कि 15 जिलों बदायूं, श्रावस्ती, गोरखपुर, अलीगढ़, मैनपुरी, कासगंज, उन्नाव, पीलीभीत, बुलंदशहर, एटा, खीरी, अम्बेडकरनगर, बरेली, संतकबीरनगर व प्रतापगढ़ में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है।
जनसुनवाई प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश
वहीं लखनऊ, कानपुर व वाराणसी समेत 48 जिलों में जनशिकायतों में 30 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई। डीजीपी ने इन जिलों में जनसुनवाई प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने विशेष अभियान आपरेशन दहन के तहत एएनटीएफ को प्रभावी कार्रवाई का निर्देश भी दिया।
