देहरादून। प्रदेश में उद्यान विभाग के अधीन संचालित 93 राजकीय उद्यान अब नए कलेवर में निखरेंगे। लंबे समय से उपेक्षा और सीमित संसाधनों के कारण बदहाल हो चुके इन उद्यानों के कायाकल्प की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उद्यान विभाग ने सभी राजकीय उद्यानों के जीर्णोद्धार की कार्ययोजना का खाका खींचना शुरू कर दिया है।
इस क्रम में उद्यानों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है। इसके आधार पर उद्यानों की जरूरत का आकलन कर चरणबद्ध तरीके से जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण किया जाएगा।
राजकीय उद्यानों में चौबटिया उद्यान को अपनी अलग पहचान हासिल है। इसके अलावा कुछ अन्य उद्यान भी बेहतर स्थिति में हैं, लेकिन अधिकांश राजकीय उद्यानों की हालत संतोषजनक नहीं है।
कई स्थानों पर संसाधनों की कमी, पुरानी व्यवस्थाएं और उचित रखरखाव के अभाव में उद्यान अपनी मूल उपयोगिता खोते जा रहे हैं। ऐसे में अब इन्हें केवल नाममात्र के सरकारी उद्यानों तक सीमित रखने के बजाय उत्पादन, प्रशिक्षण और आधुनिक पौध तैयार करने के केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
हाइटेक नर्सरी पर रहेगा फोकस
जीर्णोद्धार के तहत राजकीय उद्यानों में हाईटेक नर्सरी विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण फल, सब्जी, पुष्प और अन्य बागवानी प्रजातियों की पौध तैयार की जा सकेगी। स्थानीय जलवायु और किसानों की जरूरत के अनुरूप पौध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
राजकीय उद्यानों को आधुनिक बनाने से किसानों और बागवानी से जुड़े लोगों को गुणवत्तापूर्ण पौध और नई तकनीक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उद्यानों को प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे किसान नई प्रजातियों और आधुनिक बागवानी तकनीकों को मौके पर समझ सकेंगे। यही नहीं, उद्यानों को हार्टी टूरिज्म की दृष्टि से भी विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
राजकीय उद्यानों का सर्वे कर उनकी स्थिति और जरूरत के अनुसार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके आधार पर संसाधन, बजट और प्राथमिकताएं तय कर उद्यानों के कायाकल्प का काम आगे बढ़ाया जाएगा। -गणेश जोशी, कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री।
