शिमला। प्रतिकूल आर्थिक हालात और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आज वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना लगातार चौथा बजट पेश करेंगे। इस बजट को राज्य को आत्मनिर्भर बनाने और वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है।
इस बार बजट ऐसे समय में आ रहा है जब 1 अप्रैल, 2026 से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने जा रहा है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए वित्तीय संसाधन जुटाने की होगी।
बजट में आय बढ़ाने के नए विकल्पों और खर्चों के संतुलन पर विशेष फोकस रहेगा। बजट से विधायक, कर्मचारी, पेंशनर, श्रमिक और आम जनता सभी को बड़ी उम्मीदें हैं। मुख्यमंत्री सुबह 11 बजे विधानसभा में बजट पेश करेंगे।
सात सेक्टरों पर फोकस
सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि विकास के सात प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और डाटा स्टोरेज शामिल हैं। माना जा रहा है कि बजट में इन क्षेत्रों के लिए ठोस घोषणाएं हो सकती हैं।
ऋण और खर्च सबसे बड़ी चुनौती
प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण है, जबकि हर महीने वेतन, पेंशन और अन्य देनदारियों के लिए करीब 2800 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि सरकार को विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधना होगा।
बजट आकार रह सकता है लगभग समान
पिछले वर्ष 58,514 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस बार भी बजट का आकार इसी के आसपास रहने की संभावना है, हालांकि सरकार अतिरिक्त संसाधन जुटाने के प्रयास में जुटी है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने देर रात तक अधिकारियों के साथ बजट मसौदे पर मंथन किया और अपने भाषण को अंतिम रूप दिया। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार चुनौतियों के बीच विकास का संतुलित खाका कैसे पेश करती है।
